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देवशयनी एकादशी पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा व् नारायणी में आस्था की डुबकी

देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास आरम्भ

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। देवशयनी एकादशी के अवसर पर 6 जुलाई को सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड में गंगा एवं नारायणी (गंडक) नदियों के विभिन्न घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की पवित्र डुबकी लगायी।

इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा हरिहरनाथ सहित विभिन्न वैष्णव मंदिरों में माथा टेका। संध्याकालीन बेला में बाबा हरिहरनाथ का भक्तों ने श्रृंगार दर्शन किया। नौलखा मंदिर में वैष्णव भक्तों ने श्रीगजेन्द्र मोक्ष भगवान बालाजी वेंकटेश, श्रीदेवी, भूदेव, लक्ष्मी देवी एवं आलवार संतों की प्रदक्षिणा की।

देवशयनी एकादशी के अवसर पर जिला के हद में पहलेजा धाम, काली घाट सहित विभिन्न घाटों पर भक्तों ने ब्राह्मणों, दीन-हीन, असहाय निर्धन एवं अन्य जरूरतमंदों को अन्न, भोजन, फल आदि दान दिया। इस अवसर पर बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री ने बताया कि जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि (विष्णु) आगामी चार माह के लिए क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं और चातुर्मास आरंभ हो गया है।

इसे आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी एकादशी या पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि हरिशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु इस सृष्टि के संचालन का कार्य देवाधिदेव महादेव को सौंप देते हैं। श्रीहरि की अनुपस्थिति में भगवान शिव आगामी चार माह तक इस सृष्टि का संचालन करते हैं। भगवान श्रीहरि इस चार माह में योग निद्रा में रहते हैं, इसलिए इस समयावधि में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। इस अवधि को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है।

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