एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। दलित आदिवासी पिछड़ो के अत्याचार, उत्पीड़न का हब बन गया है भाजपा शासित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा राज्य। प्रधानमंत्री इस मामले में संज्ञान ले।
उपरोक्त आरोप लगाते हुए आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने 24 जून को कही। उन्होंने साफ शब्दो मे कहा कि आज भाजपा शासित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा राज्य दलित आदिवासी पिछड़ो के अत्याचार, उत्पीड़न का हब बनता जा रहा है जो देश के लिए शुभ संकेत नही है। अगर इसी तरह इन वर्गो पर जुल्म, अत्याचार, व्याभिचार, उत्पीड़न होते रहे तो आने वाले दिनों में जातिय संघर्ष की संभावना को रोका नहीं जा सकता है।
इसलिए प्रधानमंत्री इस पर अविलंब संज्ञान ले तथा जुल्मी अत्याचारीयों पर कार्रवाई करने का निर्देश दें, ताकि जुल्मी, अत्याचारियों के बढ़ते मनोबल को तोोड़ा जा सके और इन वर्गो का उत्पीड़न पर रोक लग सके। नायक ने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तरप्रदेश मे पिछड़ा वर्ग के कथावाचक को भागवत कथा कहने पर सरेआम सर के बाल छिलकर मूत्र में नाक रगड़वाने का घृणित कार्य किया गया।
दुसरी ओर दलित समाज के एक बुजुर्ग को गाय खरीद कर ले जा रहे गरीबों को गौ रक्षक संगठन के मनुवादी सोंच वालो ने आधा सर का बाल छिल कर ठेहुनी के बल चलाकर उत्पीड़न किया गया। इससे पूर्व मध्यप्रदेश मे एक आदिवासी युवक को पेशाब पिला कर उत्पीड़न किया गया जो सभ्य समाज के लिए कलंकित करनेवाला घटना है। नायक ने साफ शब्दो में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते इन घटनाओं को रोका नहीं गया तो अंजाम आने वाले दिनों मे भयंकर होगा और समाज में जातीय संघर्ष बढेगा, जिसकी जिम्मेवारी भारत सरकार एंव राज्य सरकारों की होगी।
![]()













Leave a Reply