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बंदखारों के प्रवासी मजदूरों के स्वजन कर रहे शव का इंतजार

प्रहरी संवाददाता/बगोदर (गिरिडीह)। विदेश में काम करने गए मजदूरों को काम के दौरान वेतन भुगतान के लाले तो पड़ते ही हैं, अगर वहां उनकी मौत हो जाती है तो शव को स्वदेश लाने में स्वजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

बीते कई दिनों में हजारीबाग जिला के हद में बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के बंदखारों रहिवासी जान गंवाने वाले दो मजदूर के स्वजन इन दिनों शव को घर पहुंचने और मुआवजे की गुहार शासन और प्रशासन से लगा रहे हैं।

परिजनों के अनुसार बंदखारों रहिवासी धनंजय महतो का सऊदी अरब में कई दिनों से शव पड़ा हुआ है, जबकि इसी गांव के रामेश्वर महतो का शव चार दिनों बाद भी कुवैत से स्वदेश नहीं पहुंच सका है। परिजन बताते है कि प्रवासी मजदूर धनंजय महतो की सऊदी अरब में एक माह पूर्व बीते 24 मई को मौत हो गयी, लेकिन अभी तक प्रवासी मजदूर का न तो शव घर पहुंचा और न ही परिजनों को कंपनी की ओर से मिलने वाली राशि का भुगतान का रास्ता साफ हो पाया है। इस कारण परिजनों की चिंता बढ़ने लगी है।मृतक के परिजन अपने घर के सदस्य का अंतिम दर्शन के लिए हर दिन राह देख रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि बंदखारों रहिवासी बासुदेव महतो के पुत्र धनंजय की मौत विगत 24 मई को हो गई थी। मृतक अपने पीछे पत्नी गीतांजलि देवी, पांच साल का पुत्र संजय कुमार और डेढ़ साल का सुनिल कुमार समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गया थे। प्रवासी मजदूरों के हितों को लेकर काम करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली लगातार संपर्क कर मामले का हल करने में जुटे हैं। उन्होंने कंपनी के अधिकारी से उचित मुआवजा के साथ दोनों शव को जल्द भारत भेजने की मांग की है, ताकि परिजन उनका अंतिम संस्कार कर सके।

उन्होंने कहा कि झारखंड के गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जिले की बड़ी आबादी देश- विदेश में काम करने को मजबूर है। ऐसे में मजदूरों के साथ घटना होने के बाद मुआवजा भुगतान बड़ी समस्या है। परिजन भी मुआवजा नहीं मिलने तक परेशान रहते हैं। ऐसे में महीनों तक मजदूरों का शव विदेश में पड़ा रहता है। समाजसेवी अली के अनुसार मजदूरों के घरों में शव नहीं आने से उनके घर के चूल्हे शांत पड़े हैं। परिजन हर दिन शव के इंतजार में हैं। परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पर रहा है। ऐसे में केंद्र व् राज्य सरकार को ऐसे मामले में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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