समस्तीपुर आरएमएस हो रहा बंद और प्रतिनिधि चुप्प
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। बिहार के समस्तीपुर जिला से दो लोकसभा क्षेत्र समस्तीपुर व् उजियारपुर से दो सांसद आते हैं। एक तो केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री भी हैं। एक राज्यसभा सांसद हैं और केन्द्र सरकार में कृषि एवं कल्याण राज्य मंत्री के पद पर सुशोभित हैं।
इसी क्रम में समस्तीपुर जिला के हद में 10 विधानसभा क्षेत्र है, यानी यहां से 10 विधायक भी हैं। जिनमें एक बिहार सरकार में जल संसाधन और संसदीय मामलों के मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यरत हैं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं। एक अन्य विधायक के पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का महत्वपूर्ण जिम्मा है। ये भी मुख्यमंत्री के काफी करीबी माने जाते हैं।
समस्तीपुर जिला मुख्यालय से चुनाव जीतने वाले महोदय वर्ष 2010 से लगातार विधायक हैं। एक अन्य विधायक भी हैं, जिनके माता-पिता दोनों राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और साहेब खुद भी राज्य में मंत्री पद को सुशोभित कर चुके हैं। इन 10 विधायकों के अलावे समस्तीपुर नगर निगम से एक मेयर महोदया भी हैं, जिन्होने नगर निगम चुनाव में मंत्री महोदय की पत्नी को शिकस्त देकर शहर की पहली नागरिक होने का गौरव हासिल किया है। यहां से भाजपा के एक एमएलसी भी हैं।
राजनीतिक रुप से इतना सशक्त होने के बावजूद आश्चर्य नहीं होगा कि समस्तीपुर जिला मुख्यालय का इकलौता रेलवे मेल सर्विस (आरएमएस) के बंद होने तक ये सभी नेतागण चुप्पी साधे रहें। इसे रोकने या परिवर्तित करने के लिए न कोई आवाज उठाया और न ही किसी भी स्तर पर कोशिश की गई। आरएमएस में प्रतिदिन हजारों स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री से लेकर अन्य कार्य होता रहा है। सरकार को राजस्व देने में भी यह विभाग सुमार है।
उक्त बातें महिला संगठन ऐपवा के समस्तीपुर जिलाध्यक्ष सह भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह ने 14 जून को कही। उन्होंने समस्तीपुर से आरएमएस के बंद होने की जानकारी सांझा करते हुए कहा कि एक कहावत है कि चार बेटा राम के, कौड़ी के न काम के यह बात समस्तीपुर जिला में एकदम फिट बैठता है। उक्त कहावत के जरिए उन्होंने अपना दर्द बयां की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार समस्तीपुर रेलवे जंक्शन पर स्थापित आरएमएस आगामी 16 जून से औपचारिक रुप से बंद हो जाएगा।
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