गुरु अर्जून देव की 419वां शहादत दिवस पर राहगीरों को पिलाई गयी शरबत
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु अर्जून देवजी का 419वां शहादत दिवस सादगी व् भाईचारे के साथ 30 मई को मनाया गया। इस अवसर पर जगह जगह सिख समुदाय द्वारा राहगीरों के बीच मीठा शरबत पिलाया गया।
जानकारी के अनुसार बोकारो जिला के हद में जारंगडीह स्थित गुरुद्वारा में गुरु अर्जून देवजी के शहादत दिवस पर सुखमणि साहिब का पाठ किया गया। यहां विशन और अरदास का आयोजन किया गया। इसके बाद जारंगडीह मुख्य पथ पर सैकड़ो राहगीरों के बीच चना और ठंडे मीठा जल का वितरण किया गया।

इस अवसर पर जारंगडीह गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष शार्दुल सिंह तथा कोषाध्यक्ष सर्वजीत सिंह ने कहा कि गुरु अर्जुन देवजी को सन् 1606 में मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर शहीद कर दिया गया था। इस अवसर पर उनकी याद में सिखों द्वारा छविल लगाकर गुरुजी की शहादत सम्मान किया जाता है। छबील को सिख समुदाय में दूसरे की सेवा और दया के प्रति के रूप में देखा जाता है।
कहा कि लोक कथाओं के अनुसार मुगलों के आदेशों को अस्वीकार करने पर उन्हें दंडित किया गया था। उन्हें एक जलते हुए लोहे के तवे पर बिठाकर गर्म रेत डाली गई, फिर भी गुरु अर्जुन देवजी अपने सिद्धांतों पर अड़े रहे और इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया। तब से गुरुदेव की बहादुरी, दृढ़ता और आशावाद का सम्मान करने के लिए हर साल छबील लगाई जाती है। यहां मौके पर राजकुमार, अवतार सिंह, रॉकी सिंह, राहुल सिंह, नरेंद्र सिंह, सीटू करण, राज सिंह, अमरदीप सिंह, रणदीप सिंह आदि द्वारा राहगीरों के बीच शरबत वितरण किया गया।
कथारा में सिखों के पांचवे गुरु अर्जुन देवजी की शहीदी गुरुपर्व पर शरबत वितरण
ऑफिस कॉलोनी कथारा स्थित गुरुद्वारा में सिखों के पांचवे गुरु गुरु अर्जुन देवजी की शहीदी गुरु पर्व श्रद्धा और सत्कार के साथ 30 मई को मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा में सर्वप्रथम बाबाजी सरदार महेंद्र सिंह द्वारा सुखमणि साहिब का जाप किया गया। संगत द्वारा शबद कीर्तन किया गया एवं अरदास उपरांत कड़ा में प्रसाद बनाया गया। बाद में संगत के लिए चना प्रसाद और बर्फ का सिल्ली डालकर ठंडा मीठा शरबत जल का वितरण के लिए लाया गया।

इस अवसर पर कथारा मुख्य पथ में गुरुद्वारा मार्केट में ही सैकड़ों राहगीरों को चना प्रसाद और डंडा शरबत का वितरण किया गया। कथारा गुरुद्वारा के निशांत सिंह ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यहां सेवादार गुरप्रीत सिंह, सरजीत सिंह, सतनाम सिंह, अमनदीप सिंह, चरणजीत सिंह बिट्टू, मनदीप सिंह, परमजीत सिंह, मनोज सिंह, छोटू करण, शैली, गुरमीत सिंह, प्रीत दीप सिंह और महिला संगत ने भी सेवा दी।
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