अंकुवा-चिड़िया पांच किलोमीटर जर्जर सड़क की सुधि लेने वाला कोई नहीं-नन्दलाल
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में अंकुवा मोड़ से चिड़िया माइंस तक पांच किलोमीटर जर्जर सड़क की हालत साल-दर-साल जर्जर होती जा रही है। बावजूद इसके इस जर्जर सड़क की हालत सुधारने की किसी को सुधि नहीं है।
पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में मनोहरपुर के नन्दपुर रहिवासी समाजसेवी नन्दलाल कुमार गुप्ता ने 27 मई को उक्त जर्जर सड़क की स्थिति पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड राज्य अलग तो हो गई पर आज भी राज्य के कई क्षेत्र विकास सें कोसो दूर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंकुवा मोड से चिड़िया माइंस जाने वाली पांच किलोमीटर मार्ग विगत कई सालों से जर्जर एवं मृत प्राय स्थिति में है।
उन्होंने बताया कि इस सड़क को बनाने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए एवं यहां के रहिवासियों का सच्चा मसीहा साबित कर जनकल्याण का कार्य करना चाहिए।
समाजसेवी गुप्ता ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध मनोहरपुर ओर माइन्स चिड़िया सरकार को प्रति माह करोड़ों रुपये का राजस्व देती है, पर चिरिया-अंकुआ पीडब्ल्यूडी 5 कि.मी. सड़क आज तक पक्की नही बन पाई। वर्षों से यह सड़क जर्जर है। हालांकि पिछले 10 सालों में इस सड़क का दो बार निर्माण कार्य शुरू हुआ, पर काम पूरा नही हो सका। उन्होंने बताया कि पिछली बार वर्ष 2012 में सारंडा एक्शन प्लान में कार्य के दौरान उक्त सड़क का निर्माण कार्य भी स्वीकृत हुआ।

यह सड़क एनपीसीसी द्वारा बनाई जानी थी, पर 18 जुलाई 2012 में 357.18 लाख की लागत से सड़क निर्माण का अंकुआ चौक के पास सड़क किनारे बोर्ड तो लगा, पर काम शुरू नहीं हुआ। गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित परियोजना से एनपीसीसी द्वारा सड़क का निर्माण कार्य निर्माण कंस्ट्रक्सन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाना था। लगभग 10 साल होने को हैं, सड़क निर्माण में सिर्फ सूचना बोर्ड लगाने के सिवाय कोई कार्य नही हुआ।
कहा कि तीन गांव के हजारों रहिवासियों के साथ साथ चिड़िया माइन्स से जुड़े अधिकारी, पदाधिकारी, कर्मचारी व आम राहगीर जर्जर कच्ची सड़क का उपयोग करने को विवश हैं। इस पर न तो सेल प्रबंधन, न राज्य सरकार, न ही कोई जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखा रहे हैं। जर्जर सड़क के कारण आए दिन कोई न कोई दुर्घटना भी होती रहती है। बरसात के दिनों में तो इस सड़क पर चलना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
उक्त जर्जर 5 कि.मी. सड़क से प्रभावित क्षेत्र के रहिवासियों का कहना है कि चिड़िया माइन्स के लोहा पत्थर से कई बड़े शहर चकाचौंध हैं, पर इस क्षेत्र के रहिवासियों की स्थिति दयनीय है। सेल प्रबन्धन को भी सिर्फ माइन्स से किसी तरह लोहा पत्थर निकाल ले जाने से मतलब रह गया है। क्षेत्र का विकास व रहिवासियों की समस्याओं को पूरी तरह सेल अनदेखा कर रही है।
बताया जाता है कि जर्जर सड़क को लेकर आनेवाले दिनों में क्षेत्र की जनता आक्रोश में लौह अयस्क खदान का उत्पादन ठप कर लौह अयस्क का डिस्पैच भी बंद करने को विवश हो जाएगी। तब जाकर शायद सेल प्रबन्धन व सरकार सड़क निर्माण की दिशा में सार्थक पहल करेगी। उक्त सड़क निर्माण आम जनता के निर्णय एवं जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर निर्भर करती है।
रहिवासियों ने विधायक जगत मांझी एवं सांसद जोबा मांझी को इस ध्येय से चुना है कि उक्त सड़क का निर्माण में उनकी अग्रणी भूमिका रहेगी तथा क्षेत्र के रहिवासियों को विकास की एक नई दिशा स्वाभाविक रूप से दिखेगी। साथ ही विकास को एक नई गति मिलेगी। लेकिन यह सोंच अबतक कोरी कल्पना साबित हो रहा है।
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