Advertisement

पेटरवार एवं जरीडीह की सुहागिनों ने की वट सावित्री व्रत

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। ज्येष्ठ मास अमावस तिथि 26 मई को बोकारो जिला के हद में जरीडीह एवं पेटरवार प्रखंड क्षेत्र की सुहागिनों ने पारंपरिक तरीके से वटवृक्ष-सावित्री व्रत रखा। सुहागिने विधि विधान से वट वृक्ष तले पुरोहितों द्वारा पूजा-अर्चना की तथा अर्थ, अन्न, वस्त्र, दान कर पुरोहितों को भोजन कराई।

जानकारी के अनुसार पेटरवार प्रखंड के हद में पेटरवार, बुंडू, अरजूआ, उत्तासारा, सदमाकला, चड़गी, कोह, पतकी, ओरदाना, उलगड्डा, छपरगढ़ा, चांपी, खेतको, मायापुर, चांदो, पिछरी, चलकरी, अंगवाली आदि गांव में सादगी के साथ यह व्रत मनाई गई।

इसी तरह जरीडीह प्रखंड के बांधडीह, अराजू, बाराडीह, बारु, बालीडीह, टांड़मोहनपुर, तेतरियाडीह, गांगजोरी, तीरो, पथुरिया, तुपकाडीह, तांतरी, अरालडीह, कटका, मिश्रा साइड जैनामोड़ आदि क्षेत्रों में बटवृक्ष-सावित्री व्रत की धूम रही।
पेटरवार प्रखंड के हद में अंगवाली उत्तरी पंचायत के राजाटांड़ टोला स्थित पुराने वट वृक्ष के निकट आचार्य बबलू पांडेय ने सैकड़ों व्रतधारी सुहागिनों को पूजा करवाए एवं उन्हें बिठाकर सती सावित्री व् सत्यवान की कथा श्रवण कराये।इनके साथ पुत्र कृष्णा कुमार एवं हर्ष कुमार बैठे रहे।

इसी तरह बनेथानधाम में रामपद बाबा, कोचाकुल्ही, भगतबांध में संतोष बाबा, राजेश, बगीचा सड़क किनारे चबूतरा में कपिल पांडेय, छपरडीह में राजेश चटर्जी, खेड़ों में शिवकुमार चटर्जी आदि पुरोहितों ने पूजा कराए। पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने अपनी चतुराई व बुद्धिमता से यमराज से अपनी मृत पति के प्राण पुनः वापस लिया। इस तरह सुहागिन के साथ साथ पुत्रवती बनी। कहते हैं, वट वृक्ष की अधिकतर शाखाएं नीचे झुकी रहती है, जिसमे सावित्री की आत्मा बसी हैं। इसीलिए इस व्रत को रख यहां पूजा करने का विधान है। सुहागिनों ने पुरोहितों को वस्त्र, अन्न, अर्थ आदि दान दिए। साथ हीं घर आकर अपने अपने पति को बांस के फंखे से हवा दी गयी।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *