एस. पी. सक्सेना/बोकारो। आस्था और विश्वास के साथ अपने अखंड सौभाग्य के सुखी व् दीर्घायु होने की कामना करते हुए सुहागिन महिलाओं ने 26 मई को वट सावित्री की पूजा की। जगह जगह महिलाएं वट वृक्षों में धागा बांधे।
इस कर बोकारो जिला के हद में कथारा क्षेत्र में जगह जगह समूह बनाकर वट-वृक्ष के सम्मुख सुहागिनों ने वट सावित्री व्रत की पूजा की। एक मात्र कामना सौभाग्य की रक्षा को मन में धारण करती हुई व्रतियों ने पूजनोपरान्त एक दूसरे को सिंदूर लगाकर एवं प्रसाद देकर अपनी खुशी का इजहार की।
ज्ञात हो कि व्रतियों के बीच पूजा करने व व्रत रखने का विधि विधान भले ही अलग अलग रहा हो, परंतु लक्ष्य और उद्देश्य एकमात्र रहा अचल सौभाग्य की कामना। यहां महिलाओं ने सती सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण किया, जिसने अपने पति के प्राण रक्षा के लिए यमराज से भीड़ गयी और अपने पति की प्राण रक्षा में सफल रही।
इस संदर्भ में व्रतियों से पूछे जाने पर उनके द्वारा पूजा किए जाने एवं व्रत रखने की विधि विधान मे थोड़ी बहुत भिन्नता व रीति रिवाज मे अंतर दिखा, परंतु उद्देश्य सबों का एक ही बताया गया। कुछ व्रतियों ने पूजनोपरान्त पारण करने एवं भोजन करने की कही। वहीं कुछ सुहागिनों ने पूजनोपरान्त 24 घंटे का उपवास रखने की बात कही।
जबकि कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि व्रत के एक दिन पूर्व ही उपवास रखकर पूजा करने की परंपरा है। पूजन स्थल पर कुछ कुछ जगहों पर कथारा दो नम्बर शिव मंदिर के पुजारी राजेन्द्र मिश्रा और कथारा 4 नम्बर मंदिर के पुजारी रवि पाण्डेय द्वारा मंत्रोच्चारण कर पूजा करने कराने का विधान देखने को मिला। वहीं कुछ कुछ स्थानों पर व्रतियों ने स्वयं पूजन करती देखी गई। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह हमारी पूर्व से चली आ रही परंपरा के अनुसार होता रहा है।
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