एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड में भाजपा व् कांग्रेस सरना धर्म कोड को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रही है। जब दोनों पार्टी सत्ता में थे, तब आदिवासियों के अधिकारों को कुचला, अब वोट के लिए सिर्फ नौटंकी कर रहे हैं।
उपरोक्त बातें 25 मई को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने भाजपा – कांग्रेस द्वारा सरना धर्म कोड पर आदिवासी समाज को भ्रमित कर वोट की राजनिति करने पर प्रतिक्रिया में कही। उन्होंने कहा कि सरना धर्म कोड पर कांग्रेस और भाजपा सिर्फ पाखंड करने का कार्य कर रही है। कहा कि सरना धर्म कोड के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा की ढोंग भरी राजनीति की मंच कड़े शब्दों में निंदा करती हैं। दोनों दल आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान को लेकर केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2014 में यूपीए सरकार के दौरान सरना धर्म कोड को खारिज कर आदिवासियों की धार्मिक पहचान को नजर अंदाज किया था। अब झारखंड में सत्ता की सहयोगी होने के बावजूद, वह केवल आंदोलन का दिखावा कर रही है। सांसद सुखदेव भगत एवं बन्धु तिर्की की उछल कुद तथा हालिया बयान, जिसमें उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाए, मात्र राजनीतिक नौटंकी है।
क्योंकि कांग्रेस ने स्वयं केंद्र में रहते हुए इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कहा कि भाजपा-कांग्रेस सरना धर्म कोड पर समर्थन दिखाना एवं आन्दोलन करने का नाटक सिर्फ घड़ियाली आंसू भर हैं। जब सत्ता में थे, तब आदिवासियों के अधिकारों को कुचला, अब वोट के लिए नाटक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा में भाजपा भी इस मुद्दे पर दोहरा चरित्र दिखा रही है। वर्ष 2020 में झारखंड विधानसभा द्वारा सरना धर्म कोड के लिए प्रस्ताव पारित होने के बावजूद केंद्र में भाजपा सरकार इसे लागू नहीं किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में वादा किया कि भाजपा सत्ता में आने पर सरना धर्म कोड लागू करेगी, लेकिन यह केवल चुनावी जुमला है।
भाजपा ने 2011 की जनगणना में सरना को धर्म के रूप में शामिल नहीं किया, जिससे लाखों आदिवासियों को अपनी पहचान खोनी पड़ी। उन्होंने कहा कि भाजपा का सरना धर्म कोड का वादा खोखला है। केंद्र में 11 साल से सत्ता में रहने के बावजूद, आदिवासियों की धार्मिक पहचान को मान्यता देने में नाकाम रही। और तो और इन्होने जनगणना कालम से अन्य के कालम को भी हटाकर जबरदस्ती आदिवासी समाज को हिन्दू बनाने का षडयंत्र रचा जो आदिवासी समाज के साथ सरासर धोखा है।
उन्होंने कहा कि मंच दोनों दलो के राष्ट्रीय अध्यक्षो से मांग करती है कि आदिवासी समुदाय के साथ राजनीतिक पाखंड बंद करें और सरना धर्म कोड को तत्काल लागू कराने की दिशा मे सकरात्मक एंव ठोस पहल करे। यह आदिवासियों का मौलिक अधिकार है, जिसे जनगणना में शामिल कर उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को संरक्षित किया जाए।
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