एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल में हुए हादसा सरकार के लिए कलंक है। इसकी नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को इस्तीफ दे देना चाहिए। साथ ही उक्त घटना में मृतक के आश्रित को पचास पचास लाख रुपए और सभी घायल को पांच लाख रुपए मुआवजा दिये जायें।
उपरोक्त बातें 4 मई को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में हुए हादसे से तीन आदिवासी गरीब मरीज की मौत होने पर आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने अपनी प्रतिक्रिया मे कही।
उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि घटना के दोषीयों को कड़ी से कड़ी सजा देने के दिशा में कार्य करने का पहल करे, ताकि ऐसी घटनाओ की पुनरावृत्ति न हो।
नायक ने कहा कि जमशेदपुर के साकची स्थित एमजीएम अस्पताल में बीते 3 मई को बड़ा हादसा कैसे हुआ, यह जांच का विषय है। इसकी जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व मे एक कमिटि का गठन कर किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अस्पताल की चार मंजिला मेडिसिन वार्ड की छत ढहने से तीन मरीजों की मौत और दो घायल किसके लापरवाही से हुई हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल संज्ञान लिया, यह अच्छी बात है। उन्होने देर रात स्वास्थ्य मंत्री को जमशेदपुर भेजा। मगर मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा कम है। जिसका आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच विरोध करता है। साथ हीं यह मांग करता है कि मृतकों के आश्रितों को कम से कम पचास-पचास लाख रुपये और घायलों को पांच -पांच लाख रुपये मुआवजा देने का कार्य करे। घटना के लिए जो भी दोषी होंगे, उसपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
नायक ने बताया कि सबसे ऊपर से गिरी छत नीचे के तल को तोड़ती गई। दूसरी मंजिल पर इलाजरत मरीज फर्श टूटकर लटकने से नीचे जा गिरे और उनपर मलबा जा गिरा, जिसमें वे दब गए। इनमें दो आदिवासी जिसमें एक दलित 60 वर्षीय लुकास साइमन तिर्की और डेविड जॉनसन की मौत हो गई। दोनों लकवाग्रस्त थे।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एमजीएम की घटना अप्रत्याशित नही है। अस्पताल पूरी तरह अस्त व्यस्त हालत मे माफिया तत्व द्वारा कब्जा जमाये हुए है। प्रदेश का स्वस्थ्य विभाग भी सरकार के नियम कानून के तहत कभी गंभीरतापूर्वक न तो निरीक्षण किया और न ही शिकायत की गंभीरतापूर्वक जांच की। घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है, मगर स्वास्थ्य मंत्री अपनी जिम्मेवारी और लापरवाही से बच नही सकते और जनता सवाल पूछेगी कि इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ है?
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