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मानव जीवन की सार्थकता को पूरा कर सकता है प्रभु दर्शन-राजकुमार चौबे

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। इंसान अगर इच्छा बना ले तो ईश्वर की शक्तियां स्वाभाविक रूप से उसे पूरा करने में हर सक्षम रास्ता अपने आप बना देती है। इसे सार्थक कर दिखाया है पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में नोवामुंडी प्रखंड के गुवा रहिवासी प्रभु प्रेमी व ईश्वर भक्त राजकुमार चौबे ने। जिनकी प्रशंसा गुवा के रहिवासियों के जुंबा पर है।

प्रभु भक्त राजकुमार चौबे सुपुत्र स्वर्गीय महावीर चौबे के तीव्र इच्छा शक्ति ने शुरू से ही ईश्वर के प्रति अपार श्रद्धा व विश्वास रखने वालों में अग्रणी पहचान बना ली है। चौबे की दिली इच्छा है कि वे भारत के हर उस धार्मिक तीर्थ स्थान का दर्शन करें जहां स्वाभाविक रूप से हर व्यक्ति की पहुंच संभव नहीं है। इन दूरस्थ भक्ति भाव वाले स्थान का भ्रमण करते हुए चौबे भारत के सभी तीर्थ स्थलों पर जाने की लालसा रखते हैं।

साथ ही साथ उनके साथ तीर्थ स्थान जाने वाले को भी वे भरपूर तीर्थाटन में सहयोग भी करते हैं। उनके अनुसार प्रभु दर्शन ही मानव जीवन की सार्थकता को पूरा कर सकता है।
चौबे यथासंभव अपने सहयोगी को दूरस्थ तीर्थ स्थान पर ले जाकर ईश्वर का दर्शन कराते हैं। प्रारंभ से ही प्रभु दर्शन की इच्छा रखने वाले चौबे ने अब तक माता वैष्णो देवी, हरिद्वार, वृंदावन मथुरा, महाकाल, ओंकारेश्वर, ममलेश्वर, इंदौर, भीमाशंकर, त्रयंबकेश्वर, शिरडी, नासिक, केदारनाथ, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री, तिरुपति बालाजी,आशापुरा, बैजनाथ धाम व अन्य दर्जनों तीर्थ स्थान की यात्रा कर चुके हैं ।

इनका मानना है कि देश में दर्जनों ऐसी तीर्थ स्थल है जहां मनुष्य पूरा जीवन भी बीता दे तो पहुंच पाना आसान नहीं है। अतः हर मनुष्य को इस पृथ्वी पर विराजमान ईश्वरीय स्थान का दर्शन करना चाहिए तथा ईश्वर से प्राप्त आशीर्वाद के आधार पर जीवन में सदैव कल्याणकारी कार्यों को करते रहना चाहिए।

राजकुमार चौबे का मानना है कि मानव सेवा ही मानव धर्म है। अतः जीवन के हर एक क्षण में जब भी किसी की मदद व सहयोग करने का अवसर मिले वहां मानव को मुकरना नहीं चाहिए। स्वाभाविक रूप से देखा जाता है कि ईश्वर दर्शन से ईश्वरीय शक्ति प्राप्त होती है। अदृश्य रूप से वायुमंडल व ब्रह्मांड में व्याप्त ईश्वरीय शक्तियों का महत्व समझ मानव को ईश्वर से जुड़े प्रत्येक धार्मिक स्थलों का दर्शन करना चाहिए।

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