वैशाली जिले में सर्वे का हाल बेहाल, रैयत परेशान

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। राज्य सरकार के आदेश पर संपूर्ण बिहार में भूमि सर्वे की कार्यवाही जारी है। वैशाली जिला के रैयतों को बीते 31 मार्च तक सर्वे अधिकारियों के समक्ष अपनी भूमि का प्रपत्र दो जमा करना था, लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत रैयत भी अपना प्रपत्र नहीं भर पा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार भूमि सर्वे कार्य के लिए जो रैयतों को प्रपत्र दो भरकर जमा करना है, उसमें जमीन संबंधित जमीन का खाता, खेसरा, रकवा, चौहद्दी, जमाबंदी नंबर, लगान की राशि और दावे का आधार भी दर्ज करना है। लेकिन अनुमानित 75 प्रतिशत से अधिक रैयतों का जमाबंदी सही नहीं है।

बिहार सरकार ने बड़े ताम झाम से भूमि संबंधित सभी अभिलेखों को ऑनलाइन यानी कंप्यूटराइज्ड कर दिया है। लेकिन अधिकांश जमाबंदी में किसी में खाता है तो खेसरा शून्य है, किसी में खाता खेसरा है तो रखवा शून्य है। किसी-किसी में खाता खेसरा और रखवा शून्य, तो किसी जमाबंदी में जमाबंदीदार का नाम सही है तो उसके पिता का नाम गलत है। उपरोक्त सभी को सही करने के लिए रैयत राजस्व कर्मचारी से लेकर अंचल कार्यालय में दौड़ भाग कर रहे हैं। दावे के समर्थन में निबंधन कार्यालय से रजिस्ट्री दस्तावेज या अन्य दस्तावेज का नकल प्राप्त करने में रैयत भाग दौड़ करते देखे जा रहे हैं।

वैशाली जिले के कई एक किसानों ने बताया कि आंचल या हलका में जो भी राजस्व कर्मचारी हैं वे सारा काम अपने निजी बाउंसरो या दलालों के माध्यम से कर रहे हैं। जिस वजह से रैयतों का भरपूर दोहन हो रहा है। बिहार सरकार के मंत्रियों का कहना है कि इस भूमि सर्वे के बाद जमीन के मालिकाना हक पर काफी चीजें स्पष्ट हो जाएंगी और भूमि संबंधी विवाद कम हो जाएगी। लेकिन सरकारी कार्यालय में जो राजस्व कर्मचारी और ऊपर के हाकीम हैं, वे इस सर्वे कार्यवाही को सही से पूरा नहीं होने देंगे और किसानों को उम्मीद है कि इस सर्वे के बाद भूमि विवाद के और मामले बढ़ेंगे। इससे न्यायालयों में मुकदमे की बाढ़ आ जाएगी।

वैशाली जिले में किसानों और रैयतों के जमाबंदी में जो गड़बडी है, उन्हें सही करने के लिए जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक सरकार की ओर से कई शिविर लगाए गए, लेकिन शिविर में जो आवेदन दिए जाते हैं, उसका भी सही से निपटारा नहीं हो रहा है। वैशाली जिले के कई किसान को रसीद उपलब्ध कराई गयी है। जिनका आरोप है कि रसीद में सीओ और कर्मचारियों ने खेल कर रखा है।

जब भी उन्होंने इसे सुधरवाने की कोशिश की, तो या तो उनका आवेदन रद्दी की टोकरी में चला गया, या फिर उनसे नाजायज पैसों की मांग की गई। इस रसीद को गौर से देखेंगे तो आपको साफ समझ में आ जाएगा कि इसमें खाता नंबर तो दिया हुआ है, लेकिन खेसरा यानी प्लॉट नंबर है ही नहीं। सामने रकवा शून्य है। ऐसे में रैयत का स्व घोषणा पत्र कैसे जमा हो पाएगा?

स्व घोषणा पत्र दाखिल करने के लिए दिए गए अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद बिहार के राजस्व मंत्री ने रैयतों को भरोसा दिलाया है कि कुछ दिनों तक और प्रपत्र जमा होगा, लेकिन इसकी अंतिम तिथि क्या है सरकार द्वारा अभी घोषित नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि बिहार सरकार द्वारा अल्टीमेटम अंचल अधिकारी और कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए कि पहले पंचायत वार कैम्प लगाकर इन रसीदों को ठीक करें। वैसे भी स्व घोषणा की तारीख सरकार कितनी ही बार क्यों न बढ़ा दे, रसीद ठीक और जायज रहेगी ही नहीं, तो कोई किसान या जमीन मालिक स्व घषणा पत्र भरकर अपने पैरों पर क्यों कुल्हाड़ी मारेगा?

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