चास के दीपांजलि पैलेस में अटल विरासत सम्मेलन का आयोजन
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो के उपनगर चास नगर निगम पुराना कार्यालय के समीप स्थित दीपांजलि पैलेस में 12 मार्च को अटल विरासत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सैकड़ो की संख्या में बोकारो जिला के हद में विभिन्न प्रखंडो से भाजपा कार्यकर्त्ता शामिल हुए। उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक भवनाथपुर सह भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, गिरिडीह के पूर्व सांसद रविंद्र कुमार पांडेय, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सह पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ प्रह्लाद वर्णवाल, रोहित लाल सिंह, मधुसूदन सिंह, विनय कुमार सिंह, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आरती राणा, जिलाध्यक्ष जयदेव राय आदि ने भारत रत्न दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के तैल चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों का भगवा अंग वस्त्र देकर स्वागत किया गया, वहीं मुख्य अतिथि शाही ने मंचासीन अन्य अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित बतौर मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शाही ने सम्मानित किया। सम्मेलन के अंत में उपस्थित जनों ने एक दूसरे को ग़ुलाल व् अबीर लगाकर होली की बधाई दी।
इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रदेश उपाध्यक्ष शाही ने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में कुछ भी बोलने का मतलब एक पीएचडी धारी के बारे में कक्षा एक तथा नर्सरी के छात्र द्वारा जानकारी देने के समान होगा। अटल जी के बारे में बोलना सूर्य को दीपक दिखाने के समान होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने जो भाजपा रूपी बीजारोपण कर विशाल बट वृक्ष का रूप दिया है यदि उसका एक पत्ता भी हम बन जाएं तो स्वयं को शौभाग्यशाली समझेंगे। कहा कि राजनीति में सिद्धांतों पर चलनेवाला अटल जी के बराबर न कोई हुआ है और न होगा।
वे विराट हृदय सम्राट कवि व् राजनीतिज्ञ थे। कोमल हृदय व् सिद्धांत में अटल थे। यदि ऐसा नहीं रहता तो मात्र एक वोट के कारण वर्ष 1996 में सरकार न गिरती। अटल जी ने कभी भी समझौता करना नहीं सीखा। उनकी हीं देन है कि आज जंबो जेट मंत्रीमंडल 15 प्रतिशत रह गया है। राज्यों में सरकारे स्थिर है। सबसे बड़ी बात यह कि उनकी हीं देन है कि उनके कार्यकाल में झारखंड सहित तीन नये राज्य बने। जिसे वर्तमान झारखंड की हेमंत सरकार तथा उनके मंत्री (वित्त मंत्री) मिटाने की कोशिश में लगे है, लेकिन झारखंड की जनता इसे बखूबी जानती है।
उन्होंने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने सदैव समाज में सुचिता लाने का काम किया था। उनकी सबसे बड़ी देन आदिवासी हितों की रक्षा करनेवाला केंद्र में जनजातीय मंत्रालय है। पूर्व सांसद व् विशिष्ट अतिथि रविंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि जो जैसा बोयेगा वैसा पायेगा। अटल जी ने जो समाज को जो योगदान दिया उसी का परिणाम है कि आज पुरा देश हीं नहीं पुरा विश्व उन्हें याद करता है, जबकि आज के नेता को कौन पुछता है।
आज कौन कितना गलत कर रहा है वही राजनीति है। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विनय सिंह ने कहा कि दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी साधु चरित्र के स्वामी थे। उनकी जिह्वा में सरस्वती का वास था। उनकी प्रशंसा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी करते थे। वे यदि राजनीति में नहीं रहते तो निश्चित हीं वे हीं राष्ट्रकवि होते। उन्होंने कहा कि अटलजी जब बोलते थे तो उनकी केवल जिह्वा हीं नहीं उनका पुरा शरीर डोलता था। उनकी कविता में राजनीति और राजनीति में कविता था। हम सबका दायित्व बनता है कि अटलजी की विरासत उनकी वसीयत को संभालकर रखना है।

सम्मेलन में कई अन्य वक्ताओं ने भी दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता भाजपा बोकारो जिलाध्यक्ष जयदेव राय तथा संचालन जिला महामंत्री संजय त्यागी ने किया। इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ईश्वर लाल प्रजापति, लक्ष्मण स्वर्णकार, भाजपा बोकारो जिला उपाध्यक्ष अर्चना सिंह, जिला संगठन मंत्री विक्रम पांडेय, चास मंडल अध्यक्ष पिंटू राय, बोकारो नगर महिला मोर्चा अध्यक्ष ममता गोस्वामी, अनामिका दुबे, अनीता गुप्ता, चक्रधर शर्मा, पंचानन महतो, रामप्रवेश सिंह, बीपी राय आदि उपस्थित थे, जबकि सम्मेलन में बोकारो के पूर्व विधायक बिरंची नारायण तथा बेरमो के पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटूल की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बना रहा।
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