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मानव तन प्रभु कृपा का फल, तन-मन व् चित्त को सत्कर्म में लगाएं-रंगनाथाचार्य

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर के मही नदी किनारे सबलपुर में स्थित सुप्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज ने कहा कि शास्त्र को मानना सभी का मौलिक कर्तव्य है, परंतु जब इंसान शास्त्र को मानना बन्द कर देते हैं तो विवशतावश शस्त्र का सहारा लेना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जो तीन बातों को माने उसे भागवत कहते हैं। मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं और मेरा सबकुछ भगवान के लिए है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के कर्मानुसार पुनर्जन्म होता है। गरुड़ पुराण में वर्णित हैं कि अमुक कर्म करने वाला अमुक वर्ण में जाता है। मानव तन हमें भगवान की कृपा से प्राप्त हुआ है, इसलिए तन-मन और चित्त को सत्कर्म में लगाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शास्त्र को मानना सभी का मौलिक कर्तव्य है, परंतु जब इंसान शास्त्र को मानना बन्द कर देते हैं तो विवशतावश शस्त्र का सहारा लेना पड़ता है। प्रभु श्रीराम पहले शास्त्र के आलोक में व्यवहार करते हैं। वे शास्त्र की बात करते हैं, परंतु रावण ने शास्त्र न माना तो प्रभु को शस्त्र उठाना पड़ा। हमलोग का कर्म ऐसा होना चाहिए, जिससे भावी पीढ़ी सनातन धर्म व् संस्कृति के अनुसार स्वांस ले सके।

धर्मांतरण हमारे देश का बहुत बड़ा कोढ़

स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज ने कहा कि धर्मांतरण हमारे देश का बहुत बड़ा कोढ़ है। गरीबों को विभिन्न प्रकार का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता रहा है। हमें अपनो को जागृत करना होगा एवं उनके मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा।

आज की कथा में बिहार सरकार के श्रम संसाधन विभाग के मंत्री संतोष कुमार सिंह, चेनारी विधायक मुरारी प्रसाद गौतम, धर्म जागरण समन्वय के क्षेत्र प्रमुख सूबेदार सिंह, संत रविदास, आचार्य रौशन पांडेय, ओबीसी मोर्चा भाजपा की राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य अर्चना राय भट्ट, मंदिर समिति के अध्यक्ष बिनोद सिंह सम्राट, कथा संयोजक संजय कुमार सिंह, सह संयोजक व भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय प्रभारी डॉ आशुतोष कुमार, मनीष कुमार, अरुण सिन्हा, परशुराम दास, उमेश राय, अमित सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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