प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। महादेव सदैव नन्दी पर आरूढ़ होते हैं, जो धर्म के प्रतीक हैं। शिव महापुराण की कथा का उल्लेख करते हुए वाराणसी से पधारी मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने कहा कि शिव महापुराण की कथा सर्वप्रथम भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई, जिसे नंदीकेश्वर ने भी सुना। उन्होंने सनत कुमारों को सुनाया। उनसे वेदव्यास जी, सूतजी और शौनकादि ऋषियों को यह कथा सुनने का अवसर मिला।
कथावाचिका मानस मयूरी शालिनी बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के चांदो ग्राम मे आयोजित महाशिवरात्रि के मौके पर नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त आयोजित पंचदिवसीय आयोजन के दौरान 24 फरवरी को रात्रि प्रवचन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण की कथा श्रवण मात्र से पापियों को भी शिवलोक की प्राप्ति हो जाती है। माता सती के चरित्र पर व्याख्यान कहते हुए कथावाचिका ने कहा कि भगवान शिव ने मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम को वन मे देखकर जयकार लगाया तो उन्हे संदेह हुआ और कथा नहीं सुनी।
यह स्पष्ट किया कि वास्तविकता को जाने बिना प्रेम नहीं, प्रेम बिना श्रद्धा नहीं, श्रद्धा बिना विश्वास नही। जहां विश्वास नहीं होगा वहीं संशय उत्पन्न होगा। विश्वास स्वरूप भगवान शंकर साथ है, फिर मन में विश्वास नहीं है। क्योंकि विश्वास का साथ किया है संग नहीं। साथ और संग में अन्तर होता है। साथ से परिवर्तन नहीं होता है और संग का रंग जीवन बदल देता है। यह सर्वविदित् है कि, जैसी करो संगत, वैसी चढ़े रंगत। इसे अपने जीवन मे उतारने की जरूरत है।
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