करगली ग्राउंड के चुनावी सभा में गरजे जेबीकेएसएस अध्यक्ष टाइगर जयराम
एस. पी. सक्सेना/एन. के. सिंह/बोकारो। जब गुजरात गुजराती का, महाराष्ट्र मराठी का, बिहार बिहारियों का, बंगाल बंगालियों का तो झारखंड क्यों नहीं झारखंडीयो का हो सकता है। हमारी लड़ाई व्यापार करने वाले अथवा मेहनतकस से नहीं बल्कि झारखंड को लूटने वालों से है।
गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को की गई थी, लेकिन सियासतदान नेता व् भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ ने गांधी के विचारों को तिलांजली दे दी हैं। यदि मैं सांसद बना तो झारखंड की आवाज दिल्ली में गूंजेगी।
उक्त बातें 19 मई की संध्या गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी एवं झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) के अध्यक्ष टाइगर जयराम महतो ने बोकारो जिला के हद में बेरमो प्रखंड के करगली स्थित विनोद बिहारी महतो स्टेडियम में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही।
लगभग पचास हजार की भीड़ को संबोधित करते हुए टाइगर जयराम ने कहा कि हमारे बारे में जो भी कहा जा रहा है कि वह बाहरी भीतरी करता है। यह सत्य नहीं है। मेरा कहना है कि महाराष्ट्र में मराठीयों को, गुजरात में गुजरातियों को, बिहार में बिहारियों को, बंगाल में बंगालीयों के लिए जब नियोजन नीति है तो झारखंड में झारखंड के रहिवासियों के लिए राज्य सरकार द्वारा नियोजन नीति को क्यों नहीं लागू किया जा रहा है।

हमारी लड़ाई किसी राज्य वासियों से नहीं और ना ही व्यापारियों से मेरी लड़ाई है। हमारी लड़ाई वैसे नेताओं से है जिसे जनता चुनकर भेजती है और नेता अपने तथा अपने परिवार की झोली भरने में लगे रहते हैं। इसलिए हमारी मांग खतियान आधारित नीति को झारखंड में लागू करने को लेकर है।
टाइगर जयराम ने सभा में खुले मंच से कहा कि बंगाल मेरा बड़ा भाई, बिहार मंझला भाई, उड़ीसा संझला भाई है। झारखंड छोटा भाई की भूमिका में है। इसका तात्पर्य यह नहीं कि दूसरे भाई छोटे भाई के जमीन व अधिकार को हड़प ले। यदि ऐसा होता है तो छोटे भाई का विरोध स्वाभाविक है।
टाइगर जयराम ने कहा कि झारखंड में कोयला क्षेत्र का चार यूनिट सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल का कुछ अंश तथा सीएमपीडीआई है तो कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता में क्यों रहेगा। इसे झारखंड के रांची, बोकारो अथवा धनबाद में रहने की जरुरत है।
उन्होंने कहा कि देश के उद्योगों की जरूरत का 27 प्रतिशत कोयला झारखंड देता है, तो झारखंड का विकास के लिए केंद्र द्वारा इसकी हिस्सेदारी क्यों नहीं दी जाती। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि केंद्र सरकार बताए कि इंडिया का मतलब भारत है या अडानी।
जब पूर्व मे जमीन हमारी थी। उसे कोयला खनन के लिए सरकार को दिया गया था, तो उक्त जमीन पुनः झारखंडी को मिलना चाहिए। क्योंकि महात्मा गांधी के शब्दों में ही राष्ट्र का हृदय गांव में और गांव का हृदय किसानों में वास करता है।
ऐसे में झारखंड के किसान की जमीन कहां गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ था, उससे पूर्व से हमारी जमीन है तो जमीन का मालिक कंपनी क्यों होगा। सरकार जितना जमीन हमसे ली है उसकी कागजात दिखाए।
उन्होंने कहा कि आज प्रतिमाह एक करोड़ कमाने वाला नेता की जरूरत झारखंड को नहीं है। यदि वे जीतते हैं तो अपने आय का 75 प्रतिशत यहां के जनमानस में खर्च करेंगे। यही नहीं राजनीतिक परिवारवाद श्रृंखला को समाप्त करेंगे। कहा कि अभी लोकसभा चुनाव की लड़ाई सेमीफाइनल है, असल लड़ाई विधानसभा चुनाव होगी।
उन्होंने नारा लगाते हुए कहा यदि टाइगर संसद के अंदर तो हारने वाले मिट्टी के अंदर होंगे। टाइगर ने आमजनों से कहा कि आप सांसद ऐसा चुनें जो दिल्ली में जाकर दहाड़ सके। उन्होंने वर्तमान सांसद तथा बेरमो विधायक को जमकर कोसा। कहा कि कोई पार्टी अथवा नेता देश नहीं बदलता, बल्कि सोंच से देश बदलता है।
कहा कि आज गांधी की सोंच को सत्ता में बैठी सियासतदानों तथा भ्रष्ट प्रशासन तंत्र के गठजोड़ ने तिलांजलि दे दी है। झारखंड में लूट तंत्र हावी है।
इससे पूर्व हजारों की संख्या में टाइगर समर्थक बाईक व् छोटे-बड़े वाहनों में सवार होकर नारा लगाते बोकारो थर्मल, कथारा, जारंगडीह, जरीडिह मार्ग से रैली के माध्यम से टाइगर जयराम अपने समर्थकों के साथ सभा स्थल तक पहुंचे तथा सभा को संबोधित किया। यहां जेबीकेएसएस अध्यक्ष के साथ गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र प्रभारी कमलेश कुमार महतो, महाराष्ट्र के सतारा से आये उनके समर्थक सभा में शामिल थे।
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