एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। ओमान की राजधानी मस्कट में एक साल से फंसे झारखंड के गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग के 6 मजदूरों की वतन वापसी का गतिरोध अब तक दूर नहीं हो पाया है। जिसकी वजह से परेशान होकर उन मजदूरों ने फिर से सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई हैं।
उक्त जानकारी देते हुए 9 अगस्त को समाजसेवी सिकन्दर अली ने बताया कि ओमान की राजधानी मस्कट में फंसे मजदूरों में हजारीबाग जिला के हद में विष्णुगढ थाना क्षेत्र के नेरकी निवासी संजय महतो, उच्चाघाना निवासी महादेव महतो, अम्बाडीह निवासी दिनेश महतो, अर्जुन महतो, आदि।
गिरिडीह जिला के हद में बगोदर थाना क्षेत्र के महुरी निवासी किशोर महतो, बोकारो जिला के हद में पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र के पोखरिया निवासी युगल महतो शामिल है। उन्होंने बताया कि विदेश में फंसे मजदूरों का हाल यह है कि खाने-पीने के लिए सभी दाने-दाने को मोहताज हैं।
अली ने बताया कि फंसे सभी छहो मजदूर बीते वर्ष 22 दिसंबर को मोबाइल टाॅवर लगानेवाली कंपनी में काम करने के लिए ओमान की राजधानी मस्कट गये थे। जहां दो महीने वेतन मिलने के बाद पिछले पांच महीने से उन्हें वेतन नहीं मिला हैं। जिसके कारण सभी मजदूर दाने-दाने को मोहताज हो गये है। जिससे सभी मजदूरों के परिजन परेशान हैं।
प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले समाजसेवी सिकंदर अली का कहना है कि सरकार कंपनी पर दबाव बनाकर मजदूरों को बकाया मजदूरी और टिकट दिलाए। मजदूर के परिजन यहां बिलख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है।
जब काम की तलाश में मजदूर विदेश गये हैं, तब उन्हें वहां कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती है। बड़ी मुश्किल से वे वतन लौट पाते हैं। ऐसे में सरकार को इस ओर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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