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हरिहरक्षेत्र से 27वां श्रीरामानुज आध्यात्मिक यात्रा श्रीधाम अयोध्या के लिए रवाना

यात्रा में पांच दर्जन श्रद्धालु शामिल, स्वामी लक्ष्मणाचार्य कर रहे नेतृत्व

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर के नारायणी नदी किनारे साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्रमोक्ष देवस्थानम् नौलखा मन्दिर से 23 अगस्त को 27वां श्रीरामानुज आध्यात्मिक यात्रा श्रीधाम अयोध्या के लिए रवाना हो गया। इस आध्यात्मिक यात्रा का नेतृत्व हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज कर रहे थे। इस आध्यात्मिक यात्रा में लगभग पांच दर्जन श्रद्धालु शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार देवस्थानम के गोपुरम से यात्रा के लिए सोनपुर जंक्शन रवाना होने से पूर्व जगद्गुरु स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने तीर्थयात्रियों के संग भगवान श्रीगजेन्द्र मोक्ष बालाजी वेंकटेश, श्रीदेवी, भूदेवी, लक्ष्मी देवी, अल्वार संतों एवं जगदाचार्य श्रीमद्विष्वकसेनाचार्य श्रीत्रिडंण्डी स्वामीजी महाराज की पूजा -अर्चना कर मंगलमय यात्रा के लिए आशीर्वाद ग्रहण किया। इस दौरान श्रीगजेन्द्र मोक्ष भगवान एवं बाबा हरिहरनाथ के जयकारे भी लगे। उक्त यात्रा में दिलीप झा, मन्दिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मदनजीत सिंह, रमाकांत सिंह, सत्येन्द्र नारायण सिंह,भोला सिंह, फूल देवी, अनिता झा, गायत्री शुक्ल, निलीमा कर्ण सहित पांच दर्जन श्रद्धावान सम्मिलित हैं।श्रद्धावानों का यह दल सोनपुर जंक्शन से साबरमती एक्सप्रेस से सुबह में अयोध्या धाम के लिए रवाना हो गया।

स्वयं को जानने-समझने का आत्मबोध कराती है आध्यात्मिक यात्रा-स्वामी लक्ष्मणाचार्य

अयोध्या यात्रा से पुर्व स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने इस मौके पर कहा कि कोई भी आध्यात्मिक यात्रा स्वयं को जानने और अपने सच्चे स्वरूप को समझने की एक आंतरिक यात्रा है। जिसमें जीवन के गहन अर्थ, उद्देश्य और किसी उच्च शक्ति या ब्रह्मांड से संबंध की खोज शामिल होती है। यह शारीरिक सीमाओं से परे जाकर आंतरिक विकास और परिवर्तन का अनुभव करने की एक प्रक्रिया है, जो आत्म-जागरूकता, शांति और प्रामाणिकता की ओर ले जाती है।

इस अवसर पर मंदिर प्रबंधक पंडित नन्द कुमार राय ने बताया कि हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज के नेतृत्व में यह सताईसवां 15 दिवसीय आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा है। आध्यात्मिक यात्रा में शामिल पं. नन्द किशोर तिवारी ने बताया कि आध्यात्मिक यात्रा का अर्थ ही है बस सम्पूर्ण रूप से परमात्मा का बनना।

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