मुश्ताक खान/मुंबई। दारुलउलूम कादरिया बरकातिया सुन्नी जामा मस्जिद, इस्लाम पुरा का 24वां दस्तार बंदी का जश्न काफी धूम धाम से मनाया गया। वाशीनाका के बाबा बावड़ी परिसर में रमज़ान शाहा कादरी दरगाह स्थित ईदगाह कंपाउंड में हुए दस्तार बंदी में कुल 22 तालिबे इल्म बच्चों को हाफिजे कुरान के खिताब से नवाजा गया।
इस मौके पर हजरत अल्लामा सैय्यद मीर गयासुद्दीन अमजदी कादरी, मुफ्ती कलीमुद्दीन कादरी, सदर सैय्यद मेहबूब, मुकर्रम अली क़ादरी, सदर सैय्यद मेहबूब और डॉ. शम्मी खान के आलावा हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।
गौरतलब है कि वाशीनाका के दारुलउलूम कादरिया बरकातिया के 24वां दस्तार बंदी के जश्न में 22 बच्चों को हाफिजे कुरान के ख़िताब से नवाजा गया। इन में अधिकांश बच्चे ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर थे या यतीम हैं। बताया जाता है कि जिन बच्चों के गार्जियन थे वो भी दस्तार बंदी के इस जश्न में शामिल हुए।
दस्तार बंदी की सदारत कारी साहब ने किया। इसके अलावा स्थानीय नागरिक, मदरसा कमेटी के सदस्य और पढ़ने वाले बच्चे मौजूद थे। दस्तार बंदी के जश्न में इस्लामपुरा मस्जिद के इमाम मौलाना फखरुल हसन, हाफिज व कारी शौकत अली खान, नायफ सदर नूर मोहम्मद मुकासी, सैय्यद आसिफ जमाल, हादी अमीन व तमाम हजरत मौजूद थे।
इस कड़ी में खास बात यह है कि जो बच्चे अनाथ हैं, अगर उन्हें इस मदरसे का सहारा नहीं मिलता तो वे गलत राह पर भी जा सकते थे। लेकिन कुदरत का निजाम था, इस लिए आज वे इस्लाम के एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे हैं, जिसकी तमन्ना हर मुस्लमान करता है। कयास लगाया जा रहा है कि अब यही हाफिजे कुरान बच्चे दूसरों में इल्म बांटेंगे।
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