देवघर पुलिस के हत्थे चढ़ा 17 साइबर अपराधी

आरोपियों के पास से 27 मोबाइल, 44 सिम, 5 एटीएम व् 1.30 लाख नगदी बरामद

एस.पी.सक्सेना/देवघर (झारखंड)। एक ओर जहां पुरा देश साइबर आपराधिक घटनाओं से त्रस्त है वहीं दूसरी ओर देवघर साइबर थाना (Deoghar cyber police station) की पुलिस ने सत्रह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता पायी है।

पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों के पास से पुलिस ने 27 मोबाइल, 44 सिम कार्ड, 5 एटीएम कार्ड व् 1 लाख 30 हजार नगदी बरामद किया है।

जानकारी के अनुसार साइबर थाना की पुलिस ने देवघर जिला के हद में कुंडा थाना क्षेत्र के भौरा जमुआ एवं ठाढ़ी दुलमपुर, जसीडीह थाना क्षेत्र के केनमन काठी, सारवां थाना क्षेत्र के ब्रह्मतरा और मोहनपुर थाना क्षेत्र के सिरसा और घोरमारा गांव से सत्रह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

इस बाबत 27 अगस्त को आयोजित प्रेस वार्ता में पूरे मामले की जानकारी देते हुए मुख्यालय डीएसपी मंगल सिंह जामुदा ने बताया कि इन साइबर अपराधियों के पास से 27 मोबाइल, 44 सिम कार्ड, 5 एटीएम कार्ड, 12 पासबुक, 2 चेकबुक और 1 लाख 30 हजार 800 रुपया नगद बरामद किया गया है।

गिरफ्तार अपराधियों में 22 वर्षीय चंदन दास, 25 वर्षीय नंदन दास, 27 वर्षीय चंदन दास, 22 वर्षीय रवि दास, 20 वर्षीय प्रवीण यादव, 22 वर्षीय विकास दास, 19 वर्षीय मौला बक्श अंसारी, 22 वर्षीय रकीब अंसारी, 30 वर्षीय महबूब अंसारी, 25 वर्षीय मोइनुद्दीन अंसारी, 19 वर्षीय शहादत अंसारी, 20 वर्षीय बदरुद्दीन अंसारी, 23 वर्षीय सदीक अंसारी, 37 वर्षीय राजू सिंह, 19 वर्षीय विराट सिंह, 37 वर्षीय राजेश मंडल और 32 वर्षीय सुजीत मंडल का नाम शामिल है।

डीएसपी जामुदा के अनुसार गिरफ्तार साइबर अपराधी नंदन दास और चंदन दास एवं राजेश मंडल और सुजीत मंडल आपस में भाई हैं। इसके साथ ही इस बात की जानकारी दी गयी कि गिरफ्तार राजू सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है। उस पर पूर्व से मोहनपुर थाना में एक आपराधिक मामला दर्ज है।

डीएसपी ने बताया कि इन साइबर अपराधियों द्वारा साइबर ठगी की घटना को अंजाम देने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते थे। साइबर अपराधी फोन पे कस्टमर को रिक्वेस्ट भेजकर ड्रीम 11, रम्मी और तीन पत्ती गेम के माध्यम से ठगी करते हैं।

साइबर अपराधी गूगल सर्च इंजन का कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को लॉटरी का प्रलोभन देकर पैसों की ठगी करते थे। साथ ही ये साइबर अपराधी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनका एटीएम बंद होने वाला है।

इसके अलावा केवाइसी अपडेट कराने के नाम पर भी ठगी की जाती है। इन अपराधियों द्वारा साइबर ठगी के लिए गूगल पे का भी सहारा लिया जाता था। साथ ही साइबर अपराधियों द्वारा वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के माध्यम से भी ठगी की जाती थी।

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