डी एम, एसएसपी की मौजूदगी में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना
संतोष कुमार/वैशाली (बिहार)। मुजफ्फरपुर शहर के बिचोबीच स्थित औद्योगिक क्षेत्र बेला में स्थित नूडल फैक्ट्री का बॉयलर फट जाने से 26 दिसंबर की सुबह करीब आठ – साढ़े आठ बजे अफरा तफरी का माहौल बन गया।
हादसे में दस मजदूरों के मौत की पुष्टि जिला District) और पुलिस प्रशासन (Police Administration) मुजफ्फरपुर ने कर दी है। हादसे में दर्जनों मजदूरों के घायल होने की सूचना है। घायलों का इलाज सदर अस्पताल तथा श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में चल रहा है।
जानकारी के अनुसार हादसा बेला फेज टू इलाके में हुआ। बिस्फोट की भयानक आवाज और उसके बाद मचा शोर ने स्थानीय रहिवासियों को भौचक कर दिया। आनन फानन में रहिवासियों ने प्रशासन को सूचना दी।
उसके बाद मौके पर जिलाधिकारी, एसएसपी के अलावा एसडीएम और सीओ के साथ कई थानों की पुलिस भी मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। तब तक कई काल के गाल में समा चुके थे। स्वयं जिलाधिकारी डॉ प्रणव कुमार और एसएसपी जयंत कांत ने जानकारी साझा करते हुए मीडियाकर्मियों को बताया कि इस हादसे में दस मजदूरों की मौत हो चुकी है।
बिस्फोट के मलबे का अनुमान नहीं लगा पा रहे थे अधिकारी
जब बेला फैक्ट्री हादसा हुआ और अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे थे तो मीडिया कर्मियों के सवालों के जवाब में जिलाधिकारी और वहां के एसएसपी (SSP) ने बताया कि जब तक मलबा पूरी तरह से हट नहीं जाता तब तक कुछ भी कह पाना मुश्किल होगा। सभी अधिकारी मौके पर डटे थे और रेस्क्यू ऑपरेशन भी जारी रहा।
मुजफ्फरपुर जिले के बेला फेज टू में हुए बॉयलर विस्फोट हादसे में दस मजदूरों के मौत की पुष्टि के बाद भी दर्जनों घायलावस्था में एसकेएमसीएच तथा सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में इलाजरत थे। उनमें से भी कई के गम्भीर होने की चर्चा है।
हालांकि रेस्क्यू ऑपरेशन के समाप्त होने के बाद ही खुलकर बात आएगी कि कितने लोग हादसे के शिकार हुए। कितना नुकसान हुआ। हादसे के बाद इसकी सूचना पूरे जिले में सनसनी की तरफ फैल गई।
मुख्यमंत्री ने की आश्रितों चार चार लाख देने की घोषणा
राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसा के संज्ञान में आते ही यह घोषणा कर दी कि राज्य सरकार (State Government) मृतकों के आश्रितों को मुआवजे के तौर पर चार चार लाख की राशि प्रदान करेगी। मालूम हो कि मुआवजे का ऐसे हादसों के बाद प्रावधान भी है। जिसके लिए राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग जवाबदेह होता है।
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