हक और अधिकार के लिए संघर्षरत मूलवासी समाज के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के बोकारो मे अपने हक और अधिकार के लिए संघर्षरत मूलवासी समाज के युवाओं की सीआईएसएफ द्वारा पीट पीट कर हत्या बर्दाश्त नही किया जाएगा। सीआईएसएफ द्वारा किए गये लाठीचार्ज से मृत युवा प्रेम महतो के परिवार को मुआवजा एक करोड़ मिले और दोषी अधिकारीयों एवं जवानो को तत्काल 302 इरादतन हत्या के आरोप को प्राथमिकी मे जोड़ कर अनुसंधान किए जाए। साथ हीं आरोपी अधिकारी व् जवानो को मुअत्तल किया जाए।

उपरोक्त बाते 4 अप्रैल को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने बोकारो मे अपने हक और अधिकार के लिए संघर्षरत मूलवासी विस्थापित समाज के युवाओं की सीआईएसएफ द्वारा पीट पीट कर हत्या किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया मे कही। उन्होंने कहा कि आज झारखंड मे हर जगह मूलवासी आदिवासी समाज के विस्थापित जब भी हक और अधिकार के लिए संघर्ष करते है तो उनकी बातो को शांतिपूर्ण ढंग से नही सुनी जाती है, बल्कि उनके आन्दोलनो को दमन कर कुचलने हेतु लाठी, गोली, जेल भेजा जाना आम बात हो गई है, जो राज्य के आदिवासी मूलवासी समाज के लिए शुभ संकेत नही है।

नायक ने सरकार तथा प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब बड़ी घटना घटती है, तब ही ये सरकार निंद से जगती है। कहा कि जब आन्दोलन चल रहा था, तब वहां के डीसी कहां थी। जब इतनी बड़ी घटना घट गई तो घटना की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की मानते हुए कुछ मात्र बीएसएल के सीजीएम की गिरफ्तरी कराना सिर्फ मूलवासी विस्थापित समाज को धोखा देना भर है। जिसे हम आई वाश की संज्ञा देते है।

उन्होंने साफ शब्दो मे कहा कि जब आंदोलनकारियों की मांग जायज थी, तब प्रबंधन कहाँ सोई हुई थी? जब एक युवा की पीट पीट कर हत्या कर दी गई। कई आंदोलनकारी घायल हुए, स्थिति बिगड़ी तब उन्हे होश आया और उनके मांगो पर विचार किया गया। क्या शांतिपूर्ण तरीके से किये जा रहे आंदोलनो की सुनवाई नही की जा सकती? क्या अब वही आन्दोलन सफल होंगे जो रक्तरंजित रहेगें? अब हमे यह पैटर्न बदलने होगें और आन्दोलनकारीयों की बातो को धैर्यपूर्वक सुनने का प्रथम प्रयास करने होगे, तब ही बिना हिंसा हुए ही आन्दोलनकारी के समस्याओ का समाधान होगा। फिर किसी नौजवान की लाठी गोली से मौते नही होंगी।

नायक ने कहा कि मृतक के परिजनों को ₹20 लाख मुआवजा नही, बल्कि एक करोड़ मुआवजा देना होगा। एक सदस्य को नियोजन के साथ साथ उनके आश्रित परिवार के बच्चो को नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था, प्रशिक्षण पूरा कर चुके अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं को 21 दिन के भीतर नही बल्कि एक सप्ताह के अंदर पद सृजित कर तीन माह के अंदर नही बल्कि पन्द्रह (15) दिनो के अंदर सभी को नियुक्त करने का कार्य करे। साथ हीं प्रशिक्षण प्राप्त करने को ले प्रबंधन द्वारा एक सप्ताह (7) दिनो के अंदर कोचिंग की व्यवस्था करे।

साथ ही साथ बीएसएल प्रबंधन घायलों को बीजीएच में मुफ्त उपचार एवं ₹ 10,000/- मुआवजा नही बल्कि एक लाख रुपए देने की मांग की है, नही तो बोकारो प्रबंधन को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने बोकारो जिलेवासियों से अपील की है कि सभी शांति बनाएं रखें और अपने हक औरअधिकार की लड़ाई को शाांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में आन्दोलन को तेज करें।

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