अपनों की हार का कारण बनेंगे दावेदार
मुश्ताक खान
मुंबईः लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहूमत से जीत हांसिल करने वाली महाराष्ट्र भाजपा -शिवसेना युति के कार्यकताओं के हौसले बुलंद हैं। बहूमत से सरकार बनाने के बाद युति के नेता और कार्यकर्ता आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक चेंबूर और अणुशवितनगर विधानसभा के मौजूदा विधायकों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नाराज हैं। इन दोनो सीटों पर करीब आधा दर्जन से अधिक लोग चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार युति के बंटवारे में चेंबूर विधानसभा भाजपा के खाते में गई और अणुशवितनगर विधानसभा शिवसेना को मिला है। लेकिन पिछली बार बंटवारे की स्थिति साफ नहीं होने के कारण चेंबूर विधानसभा से शिवसेना के मौजूद विधायक को जीत मिली। मौजूदा समय में इन दोनों विधानसभाओं में शिवसेना के विधायक हैं।
चेंबूर के मौजूदा विधायक प्रकाश फार्तेपेकर और अणुशवितनगर के विधायक तुकाराम काते हैं। इन दोनों विधायकों से स्थानीय शिवसेना कार्यकताओं में क्षेत्रिय समस्याएं, विकास और विचारों को लेकर हमेशा तनाव की स्थिति बनी रहती है। बता दें कि यहां के शिवसेना नगरसेवकों से भी विधायकों का तालमेल बहुत अच्छा नहीं है। इसे लेकर करीब आधा दर्जन से आधिक कट्टर शिवसैनिक अभी से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं। चुनाव लड़ने का दावा करने वालों का मानना है कि इस बार के चुनाव में शिवसेना सुप्रिमों निष्ठावान और पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को नजर अंदाज नहीं करेंगे। सूत्रों की माने तो चेंबूर और अणुशवितनगर विधानसभा से 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना के उप विभाग प्रमुख प्रमोद शिंदे, अरूण हुले, राजेंद्र पोल, रूकमणी भोसले, आविनाश राणे, अजली नायक के अलावा अन्य कई नामों की चर्चा चल रही है। कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा में भी है। भाजपा से चार लोगों का नाम चर्चाओं में है लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि इन दोनों विधानसभा की सीटों पर भाजपा के कई दिग्गजों की नजर है। इसके बाद कांग्रेस -राकांपा गठबंधन की बात करें तो अणुशवितनगर विधानसभा से पूर्व मंत्री एवं राकांपा प्रववता नवाब मलिक को हरी झंड़ी मिल सकती है। वहीं चेंबूर से पूर्व मंत्री चंद्रकांत हंडोरे का लड़ना तय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में अणुशवितनगर विधानसभा से दो हारे हुए नगरसेवकों ने अपना किस्मत आजमाया था लेकिन दोनों की बूरी हार हुई थी। जिसके कारण शिवसेना को बढ़त मिली थी।इस विधानसभा से अकबर हुसेन उर्फ राजू भाई भी चुनावी मैदान में थे। बहरहाल इस बार गणित आलग होगा, जैसा कि लोकसभा चुनाव में देखा गया। कयास लगाया जा रहा है कि अब महाराष्ट्र में प्रकाश अंबेडकर और असदुद्दीन ओवैसी की बहूजन आघाड़ी निर्णायक की भूमिका में होगी। कुछ ऐसी ही स्थिति विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। ऐसे में अगर कोई सीट छुट गई तो पार्टी की टिकट के लिए लालाईत दावेदार ही अपनी पार्टी को हराने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। कयास लगाया जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव अवटुबर 2019 में होने की संभावना है। चुनाव आयोग सूत्रों की माने तो सितंबर 2019 में आदर्श अचार संहिता लग सकता है और 15 से 20 अवटुबर तक मतदान होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस बार का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होगा।
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