पीयूष पांडेय/बड़बिल (ओडिशा)। भ्रष्टाचार में लिप्त राज्य सरकार के अधिकारियों पर शिकंजा कसता दिख रहा है। सतर्कता विभाग ने 25 जुलाई को ओडिशा की वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। उन पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
सतर्कता विभाग के सूत्रों के अनुसार, कोरापुट जिला के हद में जयपुर वन प्रभाग के वन रेंज उप रेंजर-सह-प्रभारी रेंजर राम चंद्र नेपक की संपत्तियों, उनके रिश्तेदारों और राजधानी भुवनेश्वर तथा कोरापुट स्थित उनके कार्यालय कक्ष में कथित तौर पर आय के वैध स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में एक साथ छापेमारी की गई।
जयपुर के विशेष न्यायाधीश सतर्कता विभाग द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर जयपुर और भुवनेश्वर में छह स्थानों पर शुरू किए गए तलाशी अभियान में छह पुलिस उपाधीक्षकों, पांच निरीक्षकों, नौ सहायक उप-निरीक्षकों और अन्य सहायक कर्मचारियों के नेतृत्व में राज्य सतर्कता विभाग की विभिन्न टीमें शामिल थी। तलाशी अभियान के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक अधिकारियों को जयपुर शहर के गोल्डन हाइट रेजिडेंशियल अपार्टमेंट स्थित उनके फ्लैट में एक गुप्त खजाने में छिपाकर रखी गई 1.44 करोड़ रुपये की नकदी मिली।
छापे के दौरान बरामद भारी मात्रा में नकदी की गिनती के लिए गिनती मशीनें लगाई गई। सतर्कता सूत्रों ने बताया कि, इसके अलावा अबतक चार सोने के बिस्कुट और 16 सोने के सिक्के बरामद किए गये हैं। सोने का वजन किया जा रहा है। गौरतलब है कि वन अधिकारी नेपक 9 मार्च 1989 को कोरापुट सामाजिक वानिकी प्रभाग के सामाजिक वानिकी विभाग में ग्राम वनकर्मी के रूप में कार्यरत हुए थे। सामाजिक वानिकी विभाग के प्रादेशिक वन प्रभाग में विलय के बाद उन्हें जयपुर वन (प्रादेशिक) प्रभाग में तैनात किया गया था।
ओडिशा विजिलेंस के अनुसार वर्तमान में वह जयपुर वन रेंज में डिप्टी रेंजर-सह-प्रभारी रेंजर के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें 69,680 रुपये का शुद्ध वेतन और 76,880 रुपये प्रति माह का सकल वेतन मिल रहा था। यहाँ यह बताना उचित होगा कि ओडिशा विजिलेंस ने बीते 22 जुलाई को क्योंझर जिला के हद में केंदु लीफ डिवीजन के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) नित्यानंद नायक को गिरफ्तार किया था। जिसमें नायक और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पास अनुगुल जिले में करोड़ों रुपये मूल्य के 123 भूखंड पाए गए थे। सवाल है कि जब वन रक्षक ही वन भक्षक हो जाएंगे तो वनों की रक्षा कौन करेगा?
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