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कृषक पाठशाला में नावाडीह की महिला किसानों का जलवा

धान की नर्सरी से एफपीओ नेतृत्व तक महिला निभा रहीं अग्रणी भूमिका

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में नावाडीह प्रखंड में एक शांत-सी दिखने वाली ग्रामीण हलचल अब महिला सशक्तिकरण की गूंज बन चुकी है। कृषक पाठशाला, जो कभी केवल खेती की जानकारी तक सीमित थी, अब महिलाओं की आत्मनिर्भरता का मजबूत मंच बन चुकी है।

आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति (एजीवीएसएस) की पहल से संचालित इस केंद्र ने ग्रामीण महिलाओं की किस्मत को नई दिशा दी है। यहां महिलाएं अब केवल खेत में मेहनत करने वाली मजदूर नहीं, बल्कि प्रशिक्षक, नवाचारकर्ता और नेतृत्वकर्ता बन गई हैं। धान की बीज नर्सरी (बिचड़ा) तैयार करने, जैविक खेती अपनाने, एसआरआई तकनीक और मौसम-आधारित खेती के गुर सीखने में महिलाएं सबसे आगे हैं।

खेती में महिलाओं का परचम

हाल ही में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यशाला में नावाडीह की महिला किसान पुष्पा देवी और संगीता देवी ने खुद बीज नर्सरी तैयार कर अन्य महिलाओं को उसका तरीका सिखाया। खेतों में उगते धान के नन्हें पौधे इन महिलाओं की मेहनत और आत्मविश्वास की गवाही दे रहे थे। उनके हाथों में कुदाल नहीं, अब आत्मनिर्भरता की मशाल है।

एफपीओ में भी ग्रामीण महिलाओं का दबदबा

अब केवल खेती तक सीमित न रहकर ग्रामीण महिलाएं नावाडीह कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। जो महिलाएं पहले कभी गांव से बाहर नहीं जाती थीं, अब बाजार से जुड़कर उत्पाद बेच रही है। किसानों के लिए नए अवसर तलाश रही हैं। एफपीओ में महिला सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो बताता है कि परिवर्तन की हवा किस दिशा में बह रही है।

आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति के सचिव बसुदेव शर्मा बताते हैं कि, नावाडीह में बीते दस वर्षों से धान की खेती को संगठित रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें 70 से 80 प्रतिशत महिलाएं सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। इसके साथ कृषक पाठशाला के तहत एक हज़ार किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें 80 प्रतिशत महिला किसानो ने प्रशिक्षण मे भाग लिया।

प्रत्येक गांव से एक प्रगतिशील महिला किसान को प्रशिक्षण देकर प्रेरक के रूप में तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जो अपने गांव की अन्य महिलाओं को आगे लाने का कार्य करेगी। कहा कि नावाडीह की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है, जहां महिलाएं केवल खेत में नहीं, बल्कि निर्णयों की मेज पर भी बैठी हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि जब महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और मंच मिलता है, तो वे न केवल खुद को, बल्कि पूरे समाज को बदल सकती हैं।

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