डीएवी संस्था का मूल उद्देश्य आर्य समाज के सिद्धांतों पर चलकर आर्य भारत बनाना है-सहायक रीजनल ऑफिसर
सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। डीएवी पब्लिक स्कूल (DAV Public School) झारखंड ए जोन जमशेदपुर संभाग के सहायक रीजनल ऑफिसर ओपी मिश्रा के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में अच्छा संस्कार देकर उन्हें मानव बनाना है।
वर्तमान में झारखंड ए जोन जमशेदपुर संभाग के हद में संचालित स्कूलों के लगभग 16,000 अध्ययनरत बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में लगभग 250 शिक्षकों का अहम योगदान है। उक्त बातें ओपी मिश्रा ने एक भेंट में कही।
उन्होंने बताया कि बर्तमान में उनके झारखंड ए जोन जमशेदपुर संभाग के संचालित छ्ह डीएवी स्कूलो मे पश्चिम सिंहभूम जिला (West singhbhum district) के हद में गुआ, चिड़िया, नोआमुंडी, झींकपानी के साथ-साथ पूर्वी सिंहभूम के डीएवी बहरागोड़ा एवं एन.आई.टी.जमशेदपुर में बेहतर से बेहतर शिक्षा बच्चो को दी जा रही है।
दिन प्रतिदिन संस्था से उत्तीर्ण हो रहे मेधावी बच्चे राष्ट्र का एक अंगीभूत इकाई बनकर सबको सामने दिख रहें है। उन्होंने कहा कि स्कूल का माहौल ऐसा होना चाहिए कि बच्चों के कंपन में शिक्षा दिखाई पड़े। स्कूल शिक्षा का वह केंद्र है जो मंदिर और मस्जिद से भी ज्यादा पवित्र है।
सहायक रीजनल ऑफिसर मिश्रा ने बताया कि जो शिक्षा स्कूल में मिलती है, वह मंदिर और मस्जिद में भी नहीं मिल सकती है। स्कूल मस्जिद और मंदिर से भी ज्यादा पवित्र स्थान होता है। जहां पर ईश्वर की सबसे अनमोल कृति नन्हे- नन्हे बच्चे एक अच्छे इंसान, भविष्य के भारत के निर्माता बनते हैं।
उन्होंने कहा कि डीएवी संस्था का मूल उद्देश्य आर्य समाज के सिद्धांतों पर चलना और सही मायने में एक आर्य भारत बनाना है। शिक्षक का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं है। बल्कि एक भद्र समाज का निर्माण करना है। जहां अपनापन हो, एक दूसरे की सुख-दु:ख की चिंता हो और पूरे भारत का भविष्य का निर्माण हो।
इसके लिए पूरी तरीके से समर्पित हो शिक्षको को कार्य करना होगा। एआरओ मिश्रा ने बताया कि वर्तमान परिवेश में शिक्षकों को सदैव कक्षा में हंसते मुस्कुराते हुए जाना चाहिए तथा उन्हें उनके अध्यापन की विधि इतनी अच्छी होनी चाहिए कि बच्चे उनका कक्षा में आने का इंतजार करें।
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