आर पार की लड़ाई के मूड में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ
एस.पी.सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में सीसीएल (CCL) का कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन मतवाला हाथी की तरह श्रमिकों के ऊपर दमनात्मक कार्रवाई करने पर आतुर है।
इस संदर्भ में 31 दिसंबर को राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ कथारा क्षेत्र के अध्यक्ष व विधायक (MLA) प्रतिनिधि अजय कुमार सिंह (Ajay Kumar Singh) ने कहा कि प्रबंधन इन मामलों पर हमेशा टालमटोल की नीति अपनाए जा रहा है, जिससे श्रमिकों में गहरा आक्रोश है।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के मनोभाव को देखते हुए राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ किसी भी परिस्थिति में इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। वही प्रबंधन भेदभाव कर श्रमिकों के बीच रविवार कार्य दिवस को लेकर काफी गतिरोध पैदा कर रहा है।
उन्होंने बताया कि श्रमिक अपने आवास के मरम्मत के लिए 5 वर्ष से अधिक समय से प्रतीक्षारत है। पहले तो आश्वासन मिलता रहा। कायाकल्प का कार्य शुरू होने पर आवास की मरम्मति का कार्य होगा। कायाकल्प योजना के तहत कार्य शुरू होने से पहले 1 वर्ष तो कार्य नहीं हो पाया।
जब कायाकल्प का कार्य शुरू हुआ तो 2 वर्ष बाद मालूम चला कि जो प्राक्कलन में राशि का एस्टीमेट हुआ था। उसका क्वांटिटी समाप्त हो गया। इस प्रकार 3 वर्ष से अधिक का समय गुजर गया और 2 साल उसके बाद गुजरने को है।
परियोजना के असैनिक विभाग क्षेत्रीय असैनिक विभाग तथा महाप्रबंधक के संज्ञान में मामला आने के बावजूद श्रमिक 5 वर्ष से अधिक समय से अपनी परेशानी से जूझ रहे हैं। सिंह ने बताया कि श्रमिक हीरालाल गुप्ता, सुरेश महतो, छाया देवी सहित दर्जनों ऐसे कामगार है जो अपने आवास की मरम्मती के लिए परेशान है, लेकिन प्रबंधन की भूमिका मुख दर्शक वाली बनी हुई है।
वहीं पर मुख्य सड़क किनारे आवास में रहने वाले श्रमिकों की चार दिवारी 2 वर्ष से अधिक समय से गिरा हुआ है। उसके बावजूद प्रबंधन का ध्यान नहीं जाना, प्रबंधन के कार्य योजना और कार्य संस्कृति के ऊपर प्रश्न चिन्ह है। उन्होंने बताया कि आईबीएम कॉलोनी में (IBM Colony) जो रोड की मरम्मती हुई उसकी उच्चस्तरीय जांच होने पर प्रबंधन की खामियां उजागर होगी।
ऐसे में मात्र विभाग लूट खसोट और चारागाह का केंद्र बना हुआ है। प्रबंधन अगर इन मामलों में गंभीर होकर कारगर कदम नहीं उठाया तो प्रबंधन के गलत रवैया का राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ पुरजोर विरोध करेगा।
इस संदर्भ में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ का प्रतिनिधिमंडल महाप्रबंधक से मिलकर समस्याओं के निराकरण की मांग करेगा। यदि 15 दिन के अंदर सार्थक परिणाम नहीं आया तो राकोमसं के बैनर तले क्षेत्र में जोरदार आंदोलन का आगाज होगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यालय स्तर पर किसी भी मामलों में पेपर कॉरस्पॉडेंस होता है तो क्षेत्रीय प्रबंधन और परियोजना प्रबंधन को कंप्लायंस पूरा करने में वर्षों समय लगता है जो हास्यास्पद है। प्रबंधन का उक्त रवैया काफी असंतोषजनक है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर जल्द हीं एक बड़ी बैठक करके आंदोलन का आगाज होगा।
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