फसल क्षतिपूर्ति की धोषणा करें सरकार नहीं तो होगा आन्दोलन-ब्रहमदेव
एस.पी.सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। नोटबंदी से शुरू हुई बर्बादी की कहानी जीएसटी, सुखा, ओलावृष्टि, पिछले साल के लाकडाउन एवं बर्षा से होते हुए इस साल पहले लाकडाउन फिर जून माह से लगातार अत्यधिक बारिश के कारण पहले से बर्बाद समस्तीपुर जिला के हद में ताजपुर प्रखंड (Tajpur block) के किसानों को पिछले चार दिनों से हो रहे लगातार तेज हवा के साथ बर्षा मरणासन्न के कगार पर पहुंचा दिया है।

जानकारी के अनुसार पहले जलजमाव के कारण लगी फसल गलकर बर्बाद हो गया। फिर कुछ बची-खुची उपरी नमी युक्त जमीन जोत तैयार कर किसानों द्वारा फुलगोभी, बंधागोवी, बैंगन, साग, मुली आदि की खेती किसी तरह पूंजी की व्यवस्था कर किया गया।
वह भी लगातार पानी में रहने के कारण बर्बाद हो रहा है। निचली जमीन में धान की खेती नहीं हो पाने पर किसानों द्वारा उपरी जमीन में रोपा गया। वह भी तेज हवा में फलन पर आया हुआ फसल खेत में लगी पानी में गिर कर बर्बाद हो गया है।
इसे लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा ताजपुर के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह के नेतृत्व में शंकर सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, वासुदेव राय, राजदेव प्रसाद सिंह ने प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में घूम- घूमकर कर फसल क्षति का जायजा लिया। टीम ने पाया कि फुलगोभी, बंधागोभी, बैंगन, साग, मुली, धान, तंबाकू आदि फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।
किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने प्रखंड प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फसल क्षति प्रतिवेदन शून्य भेजने वाले अधिकारी अगर अभी भी शर्म-हया बचा है तो गांवों के खेतों का भ्रमण कर संपूर्ण फसल क्षति रिपोर्ट भेजकर किसानों को मुआवजा दिलाएं।
साथ ही खेतों से जल जमाव हटाने हेतु किसानों के साथ बैठक कर रणनीति बनाते हुए संसाधन उपलब्ध कराकर जल निकासी की व्यवस्था करे, ताकि रबी फसल की बुवाई हो सके। अन्यथा किसान महासभा के बैनर तले आन्दोलन तेज किया जाएगा।
उक्त आशय की जानकारी 5 अक्टूबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाकपा माले ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने देते हुए सरकार से किसानों का केसीसी समेत अन्य तमाम कर्ज माफ करने, फसल क्षति मुआवजा देने, नि: शुल्क बिजली, पानी, खाद, बीज, कृषि यंत्र आदि उपलब्ध कराने की मांग की है।
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