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घर-परिवार में तीर्थालय सा माहौल जरूरी-नीलम शास्त्री

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। सुख, शांति व् समृद्धि के लिए घर-परिवार में तीर्थालय सा माहौल का होना अति आवश्यक है। यह तभी संभव हो पाएगा, जब परिवार के हरेक सदस्य अपने अपने कर्तव्यों को भली भांति निभा पाएंगे।

उक्त बातें वाराणसी से पधारी मानस कोकिला नीलम शास्त्री ने बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के अंगवाली स्थित धर्मसंस्थान मैथान टुंगरी में आयोजित श्रीरामचरित मानस पारायण के 29वें सम्मेलन के पांचवें दिवस 12 मार्च की रात्रि प्रवचन के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसी दास ने रामचरित मानस ग्रंथ में नारियों को हरेक प्रसंग में प्रश्रय दिया है। कहा कि जिस परिवार में नारी अपमानित होती है, उस परिवार का पतन निश्चित है। जिसका जीता जागता उदाहरण महाभारत की गाथा है।

वाराणसी से ही पधारे मानस मार्तंड अच्युतानंद पाठक महराज ने मानस में वर्णित भरत चरित की व्याख्यान करते हुए कहा कि भाई भरत भातृत्व-प्रेम की पराकाष्ठा हैं।उन्होंने भाई प्रभु श्रीराम की पदकन्दुक (खड़ाऊ) को अपने सिंहासन पर रखकर चौदह वर्षों तक प्रजा की सेवा की। वहीं, आज के भाई थोड़ी सी भूमि के लिए आपसी वैमनस्यता फैलाकर एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं, जिन्हें सुखमय जीवन नहीं मिल पाता। कहा कि मानस के इस प्रसंग को आज के भाई यदि जीवन में बैठा लें तो तनिक संदेह नहीं जीवन भर पूरा परिवार सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे। उन्होंने भाई लक्ष्मण की सेवा की समर्पण भावना व केवट की प्रभुभक्ति की चर्चा की।

महायज्ञ में गिरिडीह से पधारे व्यास अनिल पाठक एवं समूह ने संगीतमय प्रवचन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पेशे से निजी चिकित्सक एक श्रद्धालु डॉ विश्वाश के सौजन्य से नित्य प्रातः पाठ के मध्य विश्राम के दौरान ब्यास सहित मंच पर विराजमान आचार्यों, पुजारियों व पाठ में बैठे युवक, युवतियों के बीच फलाहार/अल्पाहार वितरण किया जाता है।संस्थापक गौरबाबा, मंच संचालक संतोष नायक, अध्यक्ष पवन नायक सहित पूरे समिति सक्रिय रहे। कई बुजुर्ग श्रद्धालू नियमित कथा श्रवण कर रहे हैं।

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