सोनपुर में धूमधाम से श्रीगोदा – रंगनाथ विवाह महोत्सव संपन्न
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश में 13 जनवरी को धूमधाम से श्रीगोदा – रंगनाथ विवाह महोत्सव मनाया गया।
इस अवसर पर देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने एक माह से चलने वाले पुंगल पर्व के समापन के अवसर पर आयोजित श्रीगोदा- रंगनाथ विवाह महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन में विवाह परमावश्यक है। बिना विवाह वंश का संरक्षण नहीं हो सकता।
स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने सोनपुर स्थित श्रीगजेंद्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश में आयोजित श्रीगोदा- रंगनाथ विवाह महोत्सव में कहा कि विवाह एक यज्ञ है। कहा कि सोलह संस्कारों में मुख्यत्तम संस्कार विवाह है। उन्होंने कहा कि विवाह कभी भी अन्तर्जातीय नही होना चाहिए। गीता ग्रंथ के द्वितीय अध्याय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उसमें लिखा है कि अन्तर्जातीय विवाह से जो बच्चा पैदा होता है वह वर्ण शंकर हो जाता है। वर्ण शंकर पुत्र या पुत्री से पितरों को कुछ भी मिलने वाला नही है, यानि कितना भी पिण्डदान या जलार्पण या दान करें पितरों को कुछ भी प्राप्त नही होगा। पति -पत्नी दोनों का अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है।
श्रीगोदा- रंगनाथ विवाह महोत्सव, महिलाओं ने गए मंगल गीत
श्रीगोदा- रंगनाथ विवाह महोत्सव के अवसर पर महिलाओं ने विवाह सम्बन्धित मांगलिक गीत गाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सर्वप्रथम बिष्वक्सेन पूजन कलश स्थापन एवं अग्नि देवता का पूजन किया गया। इसके बाद जयमाल कन्यादान का रस्म पूरा किया गया।
विवाह महोत्सव दक्षिण भारत के श्रीविल्लीपुतुर नगर रहिवासी श्रीबिष्णुचित की पालिता कन्या आण्डाल गोदाजी का विवाह श्रीरंगम के राजा श्रीरंगनाथ भगवान जो श्रीराम के अपरावतार थे, उन्ही के साथ किया गया। गोदा देवी तुलसी वृक्ष से प्रकट हुई थी जो साक्षात भूदेवी की अवतार थी। श्रीवैष्णवो में खरमास को धनुर्मास कहा जाता है।
इस अवसर पर दिलीप झा, फुल देवी, सुरेश प्रसाद, अहिल्या देवी, अजीत सिंह, अनुराधा देवी, चिकीं देवी, मीरा देवी, सुलेखा शुक्ला, गायत्री शुक्ला, अशोक कुमार, नन्द किशोर तिवारी, गीता देवी, गौरव झा, गोपाल झा, शिवकुमार झा, शिवनारायण शास्त्री, आनन्द सिहं आदि उपस्थित थे।
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