विजय कुमार साव/गोमियां (बोकारो)। यूं तो देश में कई संस्थाएं जरुरतमंदो के लिए अपना योगदान देती रही है। इसके बावजूद गोमियां प्रखंड (Gomian block) के हद में आईईएल (IEL) के कसवागढा में स्थित माहेर संस्था क्षेत्र के अनाथ- बेसहारो के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है। संस्था को अनाथ बेसहारा अपना आश्रय केंद्र समझते हैं।
जानकारी के अनुसार अनाथ बच्चे, मानसिक रोगी एवं वृद्ध बेबस महिलाओं के लिए यह संस्था स्वर्ग से कम नहीं। इस संस्था में 15 बच्चे और 14 अत्याचार ग्रस्त एवं मानसिक रोग से पीड़ित महिलाएं हैं। इन सभी का देखभाल संस्था कर रही है।
यह संस्था अत्याचार ग्रस्त महिलाओं एवं अनाथ बच्चों को जीने की राह दिखाते हुए उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सहायता प्रदान करती है। साथ ही इनका उद्देश्य पुनर्वास कराना होता है एवं शांति के लिए सतत प्रयासरत रहते हैं।
इस संबंध में संस्था के इंचार्ज राजेश कुजूर ने बताया कि जब यहां पहली बार कोई बच्चा आता है तो उसकी मनो स्थिति ठीक नहीं होती। उन्हें डर लगता है। असुरक्षित महसूस करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उन्हें यहां उनका दोस्त मिलता है। वह यहां के रंग में ढल जाते हैं। इनको यहां मूलभूत सुविधा दी जाती है।
पढ़ाई के लिए कॉपी, पेंसिल, कला प्रशिक्षण सिखाई जाती है। यहां सभी जाति और धर्म के लिए संस्था का दरवाजा हमेशा खुला रहता है। संस्था में रहने वाले बच्चो के ख्वाब भी बड़े हैं।
वह कुछ बनना चाहते हैं और कहते हैं कि जब वह बड़े होकर नौकरी करेंगे तो अपना वेतन का आधा हिस्सा संस्था को दान देगे, ताकि यहां पर रहने वाले बच्चों को नया जीवन मिल सके। संस्था अपनी ओर से अपील करती है कि कोई अगर दान देना चाहे, ताकि यहां के बच्चों को अच्छा जीवन मिल सके तो वह दान दे सकते हैं।
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