एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए किसान को जिम्मेवार बताने वाली सरकार को चुनाव में किसान सबक सिखाएंगे।
समस्तीपुर जिला के हद में ताजपुर प्रखंड के किसानों ने 19 जुलाई को मोतीपुर सब्जी मंडी से अखिल भारतीय किसान महासभा के झंडे, बैनर एवं मांगों से संबंधित नारे लिखे तख्तियां एवं संपूर्ण किसान समुदाय को अपराधी बोलने वाले बिहार के एडीजी कुंदन कृष्ण का पूतला लेकर विरोध मार्च निकाला। विरोध मार्च मंडी क्षेत्र, नेशनल हाईवे, पेट्रोल पंप आदि का भ्रमण कर मंडी चौक पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया।
सभा में अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने संपूर्ण किसान समुदाय को अपराधी बोलने वाले एडीजी कुंदन कृष्णन को अविलंब बर्खास्त करने की मांग सरकार से की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपराध रोकने, आमजनों की जान माल की सुरक्षा करने में विफल हो चुकी है। इस सरकार में न सिर्फ अपराधी बेलगाम हो चुका है, बल्कि पुलिस पदाधिकारी भी बेलगाम हो गये है। बिहार पुलिस का एक सूत्री कार्य सिर्फ अपराधियों से मिलीभगत कर वसूली करने का रह गया है।
सड़कों पर भी दिन भर पुलिस का वसूली कार्य चलता रहता है। मंत्री बढ़ते अपराध को आपसी रंजिश के कारण बताते हैं तो इनके पुलिस पदाधिकारी अपनी नाकामियों, माफियाओं व अपराधियों से मिलीभगत को छुपाने के लिए संपूर्ण किसान समुदाय को ही अपराधी कहने से नहीं चूकते हैं।
भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने सरकार व उसके अधिकारी द्वारा किए गए किसानों के इस अपमान को गंभीरता से ली।

उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे नक्कारा अधिकारी को बिहार सरकार अविलंब बर्खास्त करे अन्यथा आसन्न चुनाव में किसान समुदाय सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू को सबक सिखाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारी पर अविलंब कारवाई करे, अन्यथा किसान बड़े आंदोलन को मजबूर होंगे। अंत में किसानों ने एडीजी कुंदन कृष्ण का पूतला फूंककर विरोध दर्ज कराया।
मौके पर राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, ललन दास, मोतीलाल सिंह, संजीव राय, कैलाश सिंह, सुनील कुमार, विश्वजीत कुमार, सुखदेव सिंह, जवाहर सिंह, हरिदेव प्रसाद सिंह, खेग्रामस के प्रभात रंजन गुप्ता आदि मौजूद थे। इस अवसर पर उपस्थित किसानों ने प्रस्ताव पारित कर समस्तीपुर के डीटीओ के मनमानी के खिलाफ पशु चारा व्यवसायी संघ का अनिश्चितकालीन हड़ताल का समर्थन करते हुए डीटीओ की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की गई। कहा गया कि यदि हड़ताल जल्द नहीं तोड़वाया गया तो मवेशी भूखे मरने लगेंगे।
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