परंपराओं को बचाना समाज की जिम्मेदारी-शैलेंद्र सिंह
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के खैराचातर में सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय प्रहरी मेला के दूसरे दिन बीते 11 मार्च की रात भव्य कीर्तन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
जानकारी के अनुसार प्रहरी मेला में आयोजित कीर्तन प्रतियोगिता में प्रखंड के हद में बगदा, शंकरडीह, जामकुदर, ललमटिया, भवानीपुर, गोरियाकुदर, खिजरा, हरनाद, रानीटांड आदि गांवों के कीर्तन दलों ने भाग लिया और अपनी मनमोहक प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को देर रात तक भक्ति रस में डुबोए रखा।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि अधिकांश कीर्तन मंडलियां महिलाओं की थी। महिलाओं द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर बगदा और ललमटिया के कलाकारों ने आकर्षक झांकियां भी प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा। वहीं सिल्ली के बाल कलाकार अश्विनी महतो की विशेष प्रस्तुति ने भी उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जरीडीह के अंचल पुलिस इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार सिंह ने विशिष्ट अतिथियों कसमार थाना प्रभारी कुंदन कुमार और अंबिका पब्लिक स्कूल जैनामोड़ के निदेशक दिनेश कुमार सिंह के साथ फीता काटकर किया। इसके बाद अतिथियों ने स्वर्गीय सुरेश जायसवाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन आज के समय में कम होते जा रहे हैं, ऐसे में प्रहरी मेला के माध्यम से इस परंपरा को जीवित रखना सराहनीय पहल है। थाना प्रभारी कुंदन कुमार ने भी आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि स्वर्गीय सुरेश जायसवाल के सामाजिक कार्यों से हमें प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी कीर्तन दलों के सदस्यों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रामसेवक जायसवाल, घनश्याम महतो, पंकज जायसवाल, अशोक कुमार सिंह, रमेश चंचल, विष्णु जायसवाल, दिलीप शर्मा, यूनुस अंसारी, अंकुश जायसवाल, अभिषेक जायसवाल, विनीत जायसवाल, सुनील कुमार महतो, भूषण महतो, सागर स्वर्णकार, जयप्रकाश वर्मा, फागू महतो, रामदयाल महतो, चतुर डोम, ढालेश्वर महतो, सेवानिवृत शिक्षक झगरू महतो, चित्तरंजन महतो, सर्वेश्वर महतो, अमृत महतो, सुमन देवी, सुबो देवी, अनीता देवी, विष्णु घासी, हुलासी देवी आदि उपस्थित थे।
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