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विश्वविद्यालय व् राज्य सरकार उचित निर्णय नहीं लेती है, तो करेंगे वृहद आंदोलन-डीके सिंह

युधिष्ठिर महतो/धनबाद (झारखंड)। झारखंड में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों के वर्ष 2008 से लंबित प्रमोशन की मांग को लेकर बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ प्रतिनिधिमंडल ने 17 जुलाई को झारखंड सरकार के प्रधान सचिव एवं निदेशक से भेंट की।

जानकारी के अनुसार बीबीएमकेयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ डी.के. सिंह और महासचिव डॉ अमूल्य सुमन बेक के नेतृत्व में उच्चतर और तकनीकी शिक्षा के प्रधान सचिव एवं निदेशक से मिलकर प्रमोशन प्रक्रिया में आ रही बाधाओं से अवगत कराया तथा इसमें आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए आग्रह किया। इस मांग पर उपरोक्त दोनों अधिकारियों ने जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

विदित हो कि विश्वविद्यालय शिक्षकों के प्रमोशन के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग झारखंड सरकार ने सीएएस-2010 को वर्ष 2022 में स्वीकृत एवं अनुमोदित किया था। जिसके पृष्ठ क्रमांक 15 में यह प्रावधान किया गया है कि पूर्वव्यापी जानकारी एकत्र करने की कठिनाइयों को दूर करने के लिए और सीएएस प्रमोशन में एक जनवरी 2009 से इन विनियमों के कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लि‍ए एपी वन आधारित प्रमोशन को पूर्वव्यापी जानकारी को एकत्र करने की कठिनाइयां को दूर करने के लिए इसे उत्तरोत्तर और भावी रूप से लागू किया जाएगा।

शिक्षकों के वर्षों से लंबित प्रमोशन के आवेदन को स्क्रूटनी प्रक्रिया पूरी करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित कर वर्ष 2023 में झारखंड लोक सेवा आयोग को प्रस्तुत किया गया था। जिसे जुलाई 2025 में आयोग ने यह कहते हुए लौटा दिया कि केटेगरी वन एवं केटेगरी टू के लिए एपी वन स्कोर से संबंधित दस्तावेज वर्ष 2008 अनुलग्न नहीं हैं।

इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष डॉ डी. के. सिंह ने कहा कि जब प्रमोशन के लिए सीएएस-2010 रेग्युलेशन वर्ष 2022 में आया है। तब कोई शिक्षक पीछे के तारीख वर्ष 2008 से इसे कैसे जमा कर सकता है, जबकि इस रेग्युलेशन में यह वर्णित है कि यह उत्तरोत्तर और भावी रूप से लागू होगा। कहा कि झारखंड लोकसेवा आयोग का यह कदम अव्यवहारिक और सीएएस के अनुरूप कदापि नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रोन्नति नहीं मिलने के कारण विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक न सिर्फ अर्थिक क्षति और मानसिक रूप से परेशान है, बल्कि विश्वविद्यालय व अन्य जगहों के शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर निकलने वाली नियुक्तियों पर आवेदन देने से भी वंचित हो जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह हमारा पहला कदम था। आगे अगर विश्वविद्यालय और राज्य सरकार समयबद्ध सकारात्मक उचित निर्णय नहीं लेती है, तो संघ आंदोलन के रणनीति तय करते हुए एक बड़ा आंदोलन करने पर विवश होगी। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से डॉ संजय सिंह, डॉ मुकुंद रविदास, डॉ मासूफ अहमद, डॉ अमूल्य सुमन बेग एवं डॉ डी.के. सिंह शामिल थे।

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