प्रहरी संवाददाता/बगोदर (गिरिडीह)। ग्रामीण विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा संचालित मनरेगा योजना का गिरिडीह जिला (Giridih District)) के हद में बगोदर प्रखंड में हाल बेहाल है। पंचायत स्तर पर न तो आम मजदूरों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है, न ही ग्रामीण विकास का सपना ही साकार होता दिख रहा है।
जानकारी के अनुसार जल संचय हेतू, तथा मजदूरों को रोजगार के लिए टीसीबी जैसे छोटे योजना को धरातल पर लाकर लाभ देना था, लेकिन इन योजनाओं में खाना पुर्ति के तहत जेसीबी मशीन से किया गया।
यह खुलासा तब हुआ जब बगोदर प्रखंड के विभिन्न पंचायतो में चल रहे योजनाओं का सोशल ऑडिट करने के लिए टीम गाँव पहुंचकर विभिन्न योजनाओं की जाँच किए सोशल टीम के बीआरपी रामसेवक यादव और सीआरपी रवि कुमार कार्यस्थल में जाकर जाँच किया।
इस दौरान रामसेवक यादव ने कहा कि समावर्ति समाजिक अंकेक्षण चार पंचायत में किया गया, जिसमें बेको पश्चिमी, बेको पुर्वी, अलगडीहा शामिल है। इस अंकेक्षण से साफ पता चलता है की मनरेगा योजना में भारी अनियमता बरती गई है।
यही नही पर्यावरण संरक्षण व मजदूरों को रोजगार के लिए बिरसा हरित व्यक्तिगत आम बागवनी के तहत पैधे लगाना था, लेकिन अलगडीहा पंचायत में जंगल के जमीन पर लगाया गया है।
उस जमीन पर पहले फॉरेस्ट विभाग द्वारा पैधा लगाया गया था। पौधे मर जाने के बाद उसी स्थान पर आम बागवानी लगा दिया गया। और तो और इसी पंचायत में तीन योजनाओं में बिना काम किए ही कागज पर तीन योजनाओं का राशि 83 हजार 700 रु० का अवैध निकासी कर ली गई हैं।
बताया गया कि यहां बिचौलिये हावी रहने के कारण इस क्षेत्र के मजदूर वर्ग के लोगों को रोजगार नही मिलने के चलते काम की तलाश में दुसरे प्रदेशों की ओर पलायन करना विवशता है। जानकारों की माने तो योजना के अंतर्गत काम उन्हीं मजदूरों को दिया जाता है।
जो प्रतिनिधियों और पंचायत रोजगार सेवकों के विश्वासपात्र होते हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो मजदूरों का काम सिर्फ बैंक से पैसा निकासी कर बिचौलिये के पास पहुंचाने तक सिमट गया है। हालांकि, इसके लिए उन्हें उचित पारिश्रमिक मिल जाती है।
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