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उगते सूर्य को अर्घ के साथ संपन्न हुआ आस्था का महापर्व छठ

धीरज शर्मा/विष्णुगढ़ (हजारीबाग)। लोक आस्था और भक्ती का महापर्व छठ पुजा के चौथे दिन 31 अक्टूबर के सुबह विष्णुगढ़ प्रखंड के हद में गाल्होवार स्थित शिव मंदिर छठ घाट तलाब में उगते सूर्य भगवान भास्कर को अर्ध्य के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सैकड़ो श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

चार दिवसीय आस्था का महापर्व छठ को लेकर व्रतियों ने सूर्य देव को दूसरा अर्घ्‍य दिया और छठी मैया की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न हो गया। छठ पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन तड़के ही उगते सूरज को अर्घ देने के लिए छठ व्रतीयों और उनके परिजन अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ घाटों पर पहुंचे और घुटने तक पानी में खड़े होकर व्रतधारियों ने सूप, ईख, नारियल, आदि।

मिट्टी के दीया, बर्तन, फल, फुल बेल पत्र, ठकुवा, सूप, बांस की डलिया में पूजन सामग्री सहित गाय के दूध से भगवान सूर्य को अर्घ दिया। छठ व्रतियों ने इस अवसर पर पुरे क्षेत्र के सुख, शांति, समृद्धि की कामना की। साथ हीं छठ व्रतियों ने गांव के सभी मंदिरो में पूजा अर्चना की। इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया।

इसी के साथ ही व्रत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया। आस्था का महापर्व छठ पूजा को लेकर छठ घाट में रहिवासियों के बीच धार्मिक श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। इस दौरान छठ पूजा के पारंपरिक गीत गूंजते रहे।

बता दें कि, छठ का पर्व बीते 28 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था। दूसरे दिन 29 अक्टूबर को खरना या लोहंडा पर गुड़ की खीर बनाई गई। तीसरे दिन 30 अक्टूबर की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। आखिरी दिन 31 अक्टूबर को उगते सूर्य भगवान भास्कर को अर्घ अर्पित किया गया।

माना जाता है कि जल में कमर तक खड़े होकर सूर्य को अर्घ देने की परंपरा महाभारत काल से शुरू हुई। सप्तमी तिथि को वर्ती जल में कमर तक खड़े होकर उगते भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं। अर्घ देने से कुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं। जिससे मनोकामना पूर्ण होती है।

जानकारी के अनुसार छठ घाट परिसर में स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर से छठ घाट को साफ सफाई से चमका कर व्रतियों की सुविधाएं के लिए टेंट के साथ जगह-जगह लाइट की व्यवस्था किया गया था। इस अवसर पर घाट में हजारों की संख्या में छठ व्रतियों, श्रद्धालूगण, जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।

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