प्रहरी संवाददाता/हाजीपुर (वैशाली)। हाजीपुर प्रखंड (Hazipur block) के हद में बाकरपुर डुमरी के नारायणी तट स्थित उत्तर बिहार के एकलौते भगवान परशुराम मंदिर में 27 फरवरी को स्वामी सहजानन्द सरस्वती और जननायक किशोरी प्रसन्न सिंह की जयंती एकसाथ मनाई गई।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित गणमान्यों ने दोनों महापुरुषों के जीवन चरित्र तथा समाज में उनके योगदानों पर प्रकाश डाला।
जयन्ति समारोह के अवसर पर दोनों महापुरुषों का जीवन परिचय देते हुए वैशाली जिला न्यायालय के अधिवक्ता एवं कलमकार गंगोत्री प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वामी सहजानन्द और किशोरी प्रसन्न सिंह दोनों महान पुरुषों का जन्म महा शिवरात्रि के दिन हुआ था।

उन्होंने बताया कि स्वामी सहजानन्द का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले के देव ग्राम में हुआ, लेकिन स्वामीजी का कार्य क्षेत्र बिहार रहा। स्वामीजी बिहार के किसान और मजदूर हित के लिये आजीवन संघर्ष करते रहे। उनका पार्थिव शरीर भी बिहार के मिट्टी में मिल गया।
हाजीपुर के स्थानीय पत्रकार मनीष कुमार ने किशोरी प्रसन्न सिंह के सम्बंध में बताया कि किशोरी बाबू का जन्म लालगंज प्रखंड के जगोडीह गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। किशोरी बाबू के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी बैकुण्ठ शुक्ल, योगेंद्र शुक्ल, बसावन सिंह ने आंदोलन में भाग लिया।
वर्ष 1935 में स्वामीजी ने हाजीपुर में किसान सभा का सम्मेलन बुलाया और किशोरी बाबू स्वामी जी के साथ हो गए। किशोरी बाबू अंत तक किसान और मजदूरों के लिये संघर्ष करते रहे। सन 1967 में किशोरी बाबू हाजीपुर से विधायक (MLA) भी बने। मुजफ्फरपुर से आये समाजसेवी सम्भु प्रसाद सिंह ने भी स्वामीजी और किशोरी बाबू के सम्बंध में अपना उद्गार व्यक्त किया।
जयन्ति समारोह में उपरोक्त के अलावा अधिवक्ता मुकेश रंजन, ललन चौधरी, सन्तोष, सुजीत कुमार भारद्वाज, गौतम कुमार, मृणाल मणी ओझा, आशुतोष कुमार, रंजीत सिंह, रणजीत कुमार, दिलीप कुमार सहित उपस्थित रहिवासियों ने स्वामीजी और किशोरी बाबू के चित्र पर पुष्प अर्पित किया।
साथ ही भगवान परशुराम के चरणों मे पुष्प अर्पित किया। मन्दिर के व्यवस्थापक रणजीत कुमार चौधरी ने आगत अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन किया।
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