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अधिवक्ताओं ने जिला पदाधिकारी से की फरियाद

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिले (Vaishali district) के नए जिला पदाधिकारी यशपाल मीणा को जिले में आये लगभग एक माह होनेवाला है। इस दौरान नए जिला पदाधिकारी ने सम्पूर्ण जिला का भ्रमण कर लिया है। जिले के सभी छोटे बड़े सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण भी कर लिया है।

जानकारी के अनुसार एक माह की इनकी कार्यशैली से कर्मचारियों और पदाधिकारियों में हड़कम्प है। जनसमस्याओं के निदान के लिये जनता के बीच डीएम मीना (DM Meena) की अबतक अच्छी छवि बनी है।

वहीं जिला मुख्यालय हजीपुर समाहरणालय परिसर स्थित अनुमंडल कार्यालय और न्यायालय, उपसमाहर्ता भूमिसुधार कार्यालय, रेकर्ड रूम नकलखाना और निबंधन कार्यालय में जो भ्रष्टाचार व्याप्त है, इससे वैशाली की जनता काफी त्रस्त है।

बताया जाता है कि यहां एक सामान्य शपथ पत्र बनवाने में कार्यपालक दंडाधिकारी के कार्यालय में 10 के बजाये 50 रुपया नजराना लिया जाता है। निबंधन कार्यालय में एक दस्तावेज के नकल की क्या फीस है कोई कर्मचारी बताने वाला नही है, जबकि एक दस्तावेज के नकल में आम जनता से 800 से 12 सौ लिया जाता है।

वहीं सरकार (Government) के खजाने में मात्र 150 के करीब जाता है। इस संबंध में जिला विधि प्रकोष्ठ कांग्रेस (Congress) के मुकेस रंजन अधिवक्ता ने जिला पदाधिकारी से हाजीपुर मुख्यालय स्थित कार्यालयों की निगरानी व्यवस्था दुरुस्थ करने की मांग की है।

समाहरणालय परिसर स्थित जिला योजना और जिला सांख्यकी कार्यालय के सटे पश्चिम वकालत खाना परिसर में बैठने वाले अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने 4 जून को बताया कि जिला सांख्यकी भवन के बाथरूम का पानी और मल खुले में गिरता है, जिससे परिसर में गंदगी और दुर्गन्ध फैलती है।

इस सम्बंध में अधिवक्ता ने बताया कि ये समस्या वर्षों से है। भवन विभाग ने सांख्यकी कार्यालय के लिये जो भवन बनाया उसके शौचालय का मल के लिये टँकी नही बनाया गया, जिस वजह से मल खुले में गिरता है।

खास यह कि उक्त भवन जिला पदाधिकारी के जनता दरबार और मीटिंग हाल (Meeting Hall) के सटे पश्चिम में है। जब दरबार लगता है या मीटिंग होती है तो दुर्गन्ध भगाने के लिये कर्मचारी रूम फ्रेसनर सेंट का छिड़काव करते हैं।

अधिवक्ता प्रवीण कुमार, महेश प्रसाद गुप्ता, जितेंद्र कुमार ने बताया कि इन लोगो ने पूर्व जिला पदाधिकारी उदिता सिंह को लिखित आवेदन 25 फरवरी 2019 को सांख्यकी कार्यालय द्वारा खुले में शौच गिराने के सम्बंध में दिया था, लेकिन कोई निदान नही किया गया। जिला सांख्यकी पदाधिकारी द्वारा मल और पाइप को मिट्टी से ढक दिया गया।

स्थाई रूप से अबतक कोई समाधान नही किया गया। आज भी खुले में मल गिरता है। साथ ही शौचालय का पानी झरना के रूप में गिरता रहता है। शायद नए जिला पदाधिकारी की नजरे इनायत हो गई तो इस बार इस समस्या का कोई स्थायी निदान हो जाय।

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