घटना के विरोध में धरना पर बैठे गिरिडीह सांसद, रेस्क्यू टीम बुलाने की मांग
प्रहरी संवाददाता/धनबाद (झारखंड)। धनबाद जिला के हद में बाघमारा प्रखंड के बीसीसीएल ब्लॉक टू क्षेत्र के केसरगढ़ जमुनिया नदी के समीप कोल माफिया द्वारा कराया जा रहा अवैध कोयला उत्यखनन के दौरान चाल धंसने से 23 जुलाई को दर्जनभर मजदूरों के काल कवलित होने का मामला प्रकाश में आया है। मामले में स्थानीय पुलिस अनभिज्ञता जाहिर कर रही है, जबकि गिरिडीह सांसद इस घटना के विरोध में रेसक्यू टीम बुलाने तथा न्यायिक जांच की मांग को लेकर थाना के समीप धरना शुरु कर दी है। मृतको में गिरीडीह तथा जामताड़ा क्षेत्र के मजदूर बताये जा रहे है।
बताया जाता है कि घटना स्थल का निरीक्षण करने के बाद गिरीडीह सांसद बाघमारा थाना में धरना पर बैठ गए और कहा कि चाल के अंदर दबे और मृत मजदूरों को रेस्क्यू टीम बुलाकर जबतक निकाला नहीं जाता और अवैध उत्खनन करने वाले माफियाओं पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक वे स्थल से हटने वाले नहीं है।
सांसद ने 5 मृतको का नाम भी बताया जो गिरिडीह जामताड़ा आदि क्षेत्र का रहने वाला है। सांसद का आरोप है कि लगभग एक दर्जन मजदूर जो अवैध उत्खनन कर रहे थे की चाल धंसने से मौत हो गई और प्रबंधन द्वारा मुहाने में मीट्टी भर कर दफन कर दिया गया है। कहा कि बीसीसीएल प्रबंधन रेस्क्यु टीम बुलाकर खुदाई करें, तभी सच्चाई सामने आ जायेगी।
उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि घटना के बाद कोयला माफिया द्वारा प्रशासन से मिलकर रात भर प्रति मृतकों के आश्रितों को दस दस लाख रुपया देकर मैनेज किया गया है।
सांसद ने पांच मृतक का नाम बताएं जिसमें गांडेय (गिरिडीह) विधानसभा क्षेत्र के अफजल अंसारी, अलीम अंसारी, दिलीप साव सलीम अंसारी तथा जामताड़ा के जमशेद अंसारी के नाम का खुलासा किया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एनडीआरएफ टीम बुलाकर जांच कराया जाए तो सच और झूठ सामने होगा।
सांसद मामले की जांच और शव बरामदगी की मांग को लेकर बाघमारा थाना में कार्यकर्ताओं के साथ धरना पर बैठ है। घटना को लेकर राज्य सरकार और बीसीसीएल प्रबंधन मे हड़कंप मच गई है। ज्ञात हो कि कोल माफियाओं द्वारा वर्षों से बीसीसीएल के बाघमारा, महुदा, करकेंद आदि में बिना रोक-टोक अवैध उत्खनन किया जा रहा है। जबकि इसे रोकने को लेकर जिला प्रशासन, बीसीसीएल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस प्रशासन की संयुक्त बैठक प्रायः होती रहती है।
बावजूद इसके अवैध उत्खनन और कोयला तस्करी नहीं रुक रहा है। चिंतनीय यह कि जहां घटना घटी है वह जमुनिया नदी के किनारे का रास्ता भी जटिल है। ऐसे ही स्थान पर कोयला तस्करी और अवैध उत्खनन का काम चल रहा है। पुलिस प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन महज दिखावे के लिए कार्रवाई करती रही है। जिसका नतीजा बाघमारा की घटना है। हालांकि स्थानीय प्रशासन का मानना है कि बाघमारा में इस तरह की घटना नही हुई है। सच कौन है, सांसद अथवा प्रशासन यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा।
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