प्रबंधन के साथ पहले दौर की वार्ता में कुछ विन्दुओं पर बनी सहमति
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र के जारंगडीह में रैयत विस्थापित मोर्चा द्वारा पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 28 जून को भी अनिश्चितकालीन चक्का जाम दूसरे दिन भी जारी रहा।
इस अवसर पर महाप्रबंधक (General manager) कार्यालय कक्ष में हुई पहले दौर की वार्ता में कुछ विन्दुओं पर सहमति के बाद भी वार्ता सफल नहीं हो सका। वार्ता दूसरे दिन 29 जून को भी जारी रखने पर सहमति बनी।
मोर्चा द्वारा आयोजित अनिश्चितकालीन धरना में शामिल दूसरे दिन विस्थापितों को संबोधित करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा बोकारो जिलाध्यक्ष हीरा लाल मांझी ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता हमारे रैयत विस्थापित भाई है। हम पुरी तरह रैयतो के साथ हैं।

आप अपनी जरूरत के अनुसार वार्ता जरूर करें। आप सभी जिस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं उन मुद्दों पर टिके रहें। उन्होंने कहा कि कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन के साथ कुछ मुद्दों पर बात हुई है। उसपर भी ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रबंधन को रैयत विस्थापितों के द्वारा उठाए गए सवालों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि सही तरह से बीकेबी आउटसोर्सिंग का कार्य चले, किंतु प्रबंधन की लापरवाही की वजह से ही आज रैयत विस्थापित इस तरह से दूसरे दिन भी बैठे हुए हैं। जबकि प्रशासन की ओर से भरपूर सहयोग मिल रहा है। जिससे धरना प्रदर्शन शांतिपूर्वक चल रहा है। आउटसोर्सिंग कंपनी के द्वारा ओबी गिरायें क्षेत्रों का भी उन्होंने निरिक्षण किया।
मोर्चा के जारंगडीह शाखा अध्यक्ष मोहम्मद इस्लाम अंसारी ने कहा कि क्षेत्रीय प्रबंधन को चाहिए कि हमारी भूमि का कागजात लेकर सीसीएल मुख्यालय से सलाह ले। साथ हीं पट्टा भूमि की कागजातों की सत्यता जांचकर दाबेदार रैयतो को भूमि के बदले नियोजन और मुआवजा दे। तबतक दाबेदारी स्थल पर किसी प्रकार का कार्य न कर अपनी सहूलियत के अनुसार उत्पादन कार्य करे।
इससे पूर्व कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा 28 जून की देर शाम मोर्चा को वार्ता के लिए जीएम कार्यालय में झारखंड मुक्ति मोर्चा बोकारो जिलाध्यक्ष हीरालाल मांझी एवं रैयत विस्थापितों को बुलाया गया, जहां उन्होंने प्रशासन के समक्ष प्रबंधन से वार्ता किया। वार्ता के क्रम में विस्थापित द्वारा तमाम कागजात पेश किए गए।
इस विषय पर तनवीर ने कहा कि बेरमो के पूर्व विधायक स्व राजेंद्र प्रसाद सिंह द्वारा रैयतों की मांगों को जायज ठहराते हुए उस समय के प्रबंधन एचएस अरनेजा से वार्ता भी किया था। जिसमें उन्होंने तीन नौकरी भी दी थी। बाकी की जांच की जा रही थी।
दुर्भाग्य है कि उस समय के प्रबंधन का स्थानांतरण हो जाने से मामला अधर में लटक गया, जबकि पूर्व में तमाम अधिकारियों से एवं हेड क्वार्टर के अधिकारियों से भी वार्ता किया गया, किंतु ठोस नतीजा नहीं निकलने के चलते आज रैयत विस्थापित दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। देर रात तक वार्ता चला। कुछ विन्दुओं पर सहमति के बावजूद वार्ता सफल नहीं हो सका।
वार्ता में विस्थापितों की ओर से झामुमो (JMM) बोकारो जिलाध्यक्ष हीरालाल मांझी, उपाध्यक्ष भोलू खान, झामुमो बोकारो नगर अध्यक्ष मदन महतो, मोर्चा के जारंगडीह शाखा अध्यक्ष मो. इस्लाम अंसारी, शाखा सचिव फनी राम मुर्मू, तनबीर आलम, शमशुल हक, आलम रजा, शाने रजा, बेलाल अहमद, अर्जुन हेंब्रम, हीरालाल मुर्मू, सुखदेव हेंब्रम, अर्जुन मुंडा, मो. मुख़्तार, मुजफ्फर, रुस्तम, मो. नौशाद, मो. यूनुस, मो. परवेज, दिलीप यादव आदि शामिल थे।
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