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समाज के लिए प्रेरणा श्रोत हैं उच्च शिक्षित दिव्यांग आलोक

संतोष कुमार/वैशाली (बिहार)। कहते हैं जहां चाह वहां राह। यानी चाहत पवित्र हो और इरादे बुलंद तो कठिनाईयां भी एक रूटीन टास्क जैसी दिखती है।

इन्हीं बातों से ताल्लुक रखता है वैशाली जिला (Vaishali District) के हद में हाजीपुर निवासी सह स्थानीय चर्चित रेस्त्रां फैमिली चॉइस के संचालक आलोक मिश्रा। जो दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद बड़े ही मेहनती और साहसी हैं।

एमबीए (MBA) की डिग्री भी संभवतः उन्हे मिली हुई है। जैसा कि बात चित के क्रम में उन्होंने जानकारी दी। सरल व्यक्तित्व के धनी और सभी से मुस्कुराकर काम करवाने की कला कोई आलोक से सीखे। स्थानीय रहिवासी भी उन्हें बेहद इज्जत की नजरों से देखते हैं।

बिजनेश (Bussiness) को समाज से जोड़कर एक बेहतर समन्वय के साथ अच्छी आमदनी कर लेना कोई मामूली काम नहीं। सबसे खास बात यह है कि अगर कोई युवक इस बात को लेकर निराश हो चला है कि उसमें बहुत सी कमजोरियां है।

जिसकी वजह से वह सफल नहीं हो सकता। तो उस युवक को उस संचालक दिव्यांग आलोक की कार्य शैली को कुछ देर देखने की जरूरत होगी। ऐसी चर्चा आम है उनके जानने वालों के बीच।

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