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1949 के इतिहास को रायन इंटरनेशनल स्कूल ने दोहराया

प्रहरी संवाददाता/ मुंबई । मौजूदा समय में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में भी हिंदी दिवस मनाने की परंपरा चल रही है। दर असल हिंदी दिवस मनाने का बहुत पूराना इतिहास है। 14 सितंबर 1949 से चली आ रही इस परंपरा को चेंबूर के रायन इंटरनॅशनल स्कूल में भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि वरिष्ट पत्रकार व लेखिका श्रीमती सुमन सारस्वत उपस्थित थीं। इससे कार्यक्रम की शोभा और बढ़ गई। प्रभु येशू कि प्रार्थना और

स्वागत भाषण से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया

ऑनलाइन चले इस कर्यक्रम में पत्रकार व लेखिका श्रीमती सुमन सारस्वत ने सभी को शुभकामनाएँ दी। उन्होंने हिंदी के प्रति समाज का बदलता दृष्ठि कोण व स्वावलंबी बनने आदि पर चर्चा की। इस मौके पर अध्यक्ष महोदय, अध्यक्षा महोदया कस आलावा अन्य सभी के विशेष प्रार्थना की गई। इसके बाद स्कूल के चेयरमैन ऑगस्टिन पिंटो व माननीया ग्रेस पिंटो के प्रोत्साहन से छात्र अंग्रेजी के साथ साथ, हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं को लिखने बोलने व समझने में दक्षता व आत्मविश्वास हासिल कर रहे हैं, जोकि सराहनीय है।

गौरतलब है कि हिंदी दिवस मनाने के कारण पर परिचर्चा हुई कि इसी दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी भाषा को भारतीय गणराज्य की राजभाषा घोषित किया था। हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए तत्कालीन भारत सरकार ने 14 सितंबर 1949 से प्रति वर्ष हिंदी दिवस मनाने अनुरोध किया था।

हिन्दी दिवस का इतिहास और इसे दिवस के रूप में मनाने का कारण बहुत पुराना है। वर्ष 1918 में महात्मा गांधी के दोस्त नोनो ने इसे जनमानस की भाषा कहा था और इसे देश की राष्ठ्र भाषा भी बनाने का सुझाव दिया था। सत्ता में आसीन लोगों और जाति-भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों ने कभी हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनने नहीं दिया। उसके बाद स्वागत भाषण हुआ। छात्रों ने विशेष प्रस्तुति में हास्य, रैप व कव्वाली प्रस्तुत की। अतिथि का भाषण हुआ। धन्यवाद के बाद रायन गीत और राष्ठ्रगान के साथ कर्यक्रम संपन्न हुआ।

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