वारंटी को गिरफ्तार करने गई टीम पर जानलेवा हमला
संतोष कुमार/वैशाली (बिहार)। वर्षों से आम नागरिक पुलिस सुरक्षा का मोहताज है। जिसे विधि सम्मत सुरक्षा तंत्र का एक अहम हिस्सा माना जाता रहा है। परन्तु वैशाली जिले में पुलिस को अब खुद सुरक्षा की दरकार है। क्यूंकि ऐसा कई बार हुआ, जब फरार वारंटी को कब्जे में करने गई पुलिस टीम पर हमला किया गया।
बीते 11 सितंबर की देर रात भी यही हुआ। जब वैशाली जिला के हद में महुआ थाना क्षेत्र के बदनपुर मिल्की गावं में महुआ थानाध्यक्ष कृष्णानंद झा के नेतृत्व में एक सहायक अवर निरीक्षक सहित सात पुलिस कर्मियों पर तलवार समेत अन्य पारम्परिक हथियारों से जानलेवा हमला उस समय किया गया जब वे 307 के एक फरार वारंटी को पकड़ने पहुंचे थे।
घटना में ग्रामीणों के हमले में चार बुरी तरह जख्मी बताए गए, जबकि तीन के सामान्य रूप से जख्मी होने की जानकारी है। गम्भीर रूप से हमलावरों द्वारा जख्मी किए गए पुलिसकर्मियों में एक ए एस आई और तीन चौकीदार शामिल है।
जब पुलिस टीम पर हमला हुआ और सात पुलिस कर्मी जख्मी भी हुए तो उन्हे तुरन्त महुआ अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया। हालत चिंताजनक देख सभी घायलों को हाजीपुर सदर अस्पताल लाया गया। जहां सभी इलाजरत है।
घटना को लेकर एस पी मनीष के निर्देश पर आरोपियों को तात्काल गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि अन्य उपद्रवियों की तलाश में पुलिस जुट गई है।
चर्चा यह भी है कि विभागीय शिथिलता अगर इसी तरह रही, तो पुलिस जो खुद एक सुरक्षा तंत्र का अहम हिस्सा माना जाता रहा है उसे ही सबसे अधिक सुरक्षा की जरूरत न पड़ जाए। महुआ डी एस पी पूनम केशरी ने खुद मीडिया में बयान देकर घटना की पुष्टि की है।
मालूम हो कि घटना की सूचना मिलते ही अधिकारियों की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई थी। तत्परता दिखाते हुए पुलिस बल ने उपद्रवियों को दबोच भी लिया है। विदित हो कि ऐसी घटना बिहार में पहली बार नहीं हुई है। खासकर वैशाली जिले में अपराध चरम पर है। विभागीय प्रयास महज एक रूटीन विभागीय प्रयास से अधिक नहीं कहा जा सकता।
इससे पहले भी हाजीपुर सदर थाना के अधिकारी चितरंजन ठाकुर तथा अन्य घायल हुए थे। हाजीपुर लालगंज मुख्य मार्ग पर अवस्थित ग्राम चंद्रालय में घटना घटी थी। अगर विभाग की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो पुलिस आम नागरिकों को यहां समुचित सुरक्षा देने में अक्षम साबित होती रहेगी।
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