देर हुआ तो अडानी के वसूली वाले ले जाएंगे मीटर
मुश्ताक खान/ मुंबई। लॉकडाउन की तीसरी लहर और डेल्टा प्लस वेरिएंट की धमक ने मुंबई सहित पूरे राज्य को हिला दिया है। वहीं आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और बेकारी के इस दौर में अडानी इलेक्ट्रिसिटी ने कमाई का एक और फार्मूला तैयार किया है। इसके तहत एक माह से अधिक का बकाया बिजली बिल भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली खंडित करने के साथ-साथ मीटर भी उखाड़ कर ले जाएंगे।
इसके लिए अडानी इलेक्ट्रिसिटी द्वारा वसूली अधिकारियों के साथ महाराष्ट्र सुरक्षा बल को भी तैनात किया है। ऐसे में सवाल यह उठता है की मौजूदा हालात को देखते हुए जबरन वसूली करना कहां तक उचित है। क्या राज्य सरकार जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी या बीच का रास्ता निकालेगी?
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर अडानी इलेक्ट्रिसिटी के वसूली अधिकारी कामटेकर सहित चार लोग कुर्ला पूर्व स्थित गोल्डन प्लाजा को-ऑप हाउसिंग सोसायटी में आकर वॉचमैन दिनाथ ठाकुर से मिलकर बिजली के मीटर रूम में गए। इसके बाद वसूली अधिकारी कामटेर के आदेश पर दो घरों का बिजली खंडित करने के साथ-साथ उनका मीटर भी उखाड़ कर ले गए। वहीं तीसरा शख्स कामटेकर से मिन्नतें करता रहा लेकिन वो कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।
ऐसे में कामटेकर से पूछने पर उन्होंने बताया की प्रति माह बिजली के बिलों का भुक्तान करने वालों के लिए कोई समस्या नहीं है। लेकिन जो उपभोक्ता एक माह से अधिक का बिल चुकाने में असमर्थ है उसका मीटर खंडित करने के साथ-साथ मीटर भी हम खोल लेते हैं। बता दें की वसूली अधिकारी के साथ महाराष्ट्र सुरक्षा बल के जवान, इलेक्ट्रिशियन व अन्य सहयोगी भी रहते हैं।
गौरतलब है की बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहे मुंबईकरों के सामने रोजी रोटी के साथ -साथ अब डेल्टा प्लस वेरिएंट का खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में अडानी इलेक्ट्रिसिटी द्वारा जबरन वसूली कराना ठीक नहीं। क्योंकि इससे पहले बेस्ट, रिलायंस और अडानी इलेक्ट्रिसिटी स्वयं समय दिया करते थे। ताकि उपभोक्ता अपनी सहूलत के अनुसार समय रहते बिजली बिल जमा कर सके।
लेकिन अब अडानी इलेक्ट्रिसिटी (Adani Electricity) द्वारा महाराष्ट्र सुरक्षा बल के जवानों के साथ वसूली अधिकारियों को भेजकर बिजली का मीटर निकालवाना इस बात का संकेत है की फिर से मीटर लगाने के लिए दंड के साथ पैसों की वसूली की जाएगी । ऐसे में मुंबईकरों की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी है।
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