एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। विश्व हिंदी दिवस और अंग्रेजी नव वर्ष के अवसर पर 13 जनवरी की संध्या कहानिका झारखंड अध्याय द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। गुगल मिट पर आयोजित आभासी कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतो से दर्जनों कवियों ने भाग लिया।
कहानिका झारखंड अध्याय द्वारा आयोजित गूगल मिट पर आभासी आंग्ल नव वर्ष व विश्व हिंदी दिवस पर आयोजित गोष्ठी, सुंदर सार्थक आयोजन की साधुवाद दी गयी। कवि सम्मेलन का संयोजन कहानिका के प्रधान संपादक श्याम कुमार भारती तथा संचालन मधुमिता सहाय ने की। विशिष्ट अतिथि कर्नल मनमोहन ठाकुर ने सभी का अभिनंदन किया। इस अवसर पर काहनिका पत्रिका के डिजीटल अंक का विमोचन मनीषा सहाय द्वारा पटल पर किया गया।
आभासी कवि गोष्टी कई रंगों से सजी थी। कहीं वीर रस का प्रवाह, तो कहीं लोक संगीत लोक भाषा के गीतों का प्रवाह रहा। कहीं हिंदी का गुणगान तो कहीं भोजपुरी का बखान के साथ झारखंड की खोरठा भाषा में भी रचना की प्रस्तुति ने विविधता से सजी रंगोली को पूर्णता प्रदान की।
कवि गोष्ठी में सर्वप्रथम गणेश वंदना रेनू बलाधर के सुंदर स्वर में प्रस्तुत की गई। इसके तत्पश्चात मधुमिता सहाय द्वारा सुंदर शब्दों में मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई, तत्पश्चात गोष्ठी के आरंभ में श्याम कुंवर भारती द्वारा स्वागत उद्बोधन के पश्चात अतिथियों का आशीर्वचन लिया गया। गोष्ठी में पुष्प पांडेय ने हिंदी दिवस पर अपनी रचना प्रस्तुत की। गांव की गलियों से चलकर गया देश-विदेश सरल सहजता से पाया हिंदी ने विश्व प्रवेश, सिम्मी नाथ ने हिंदी और नारी की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए उसकी उपेक्षा पर गहरी संवेदना व्यक्त करती हुई कविता का पाठ की। उर्मिला सिंह ने समय की महत्ता बताते हुए घड़ी की उपयोगिता नियत समय पर सोना 24 घंटे के दिन रात चक्र पर अपनी रचना प्रस्तुत की।

इसके पश्चात मांगीलाल ने ओज रस से परिपूर्ण शस्य श्यामला सुजलाम शुफलाम, वंदन यह है, प्रस्तुत की, जिसमें सभी राज्यों का सुंदर वर्णन व्याख्या शामिल था। दिवाकर पाठक ने शुभ मंगल का मंगल आया, नूतन वर्ष का दीप जलाए, नव वर्ष का बिगुल बजाया की रचना द्वारा आंग्ल नव वर्ष का अभिनंदन प्रस्तुत किया। वहीं प्रतिभा प्रकाश ने जब दिनकर होले से मुस्कुराए मकर बिंदु पर, उसके पश्चात उन्होंने एक अन्य रचना भी प्रस्तुत की, कुछ पाठ जो तुमने भुला दिए सुंदर सार्थक प्रस्तुति। रेनू बलाधर ने दिन सप्ताह महीने बीते बीत गया एक साल मुबारक हो नया साल प्रस्तुत की।
कवि सम्मेलन में कल्पना कुमारी ने ऑपरेशन सिंदूर पर ओज रस में प्रस्तुति प्रदान की जिस पर सभी झूम उठे। तत्पश्चात शीला तिवारी ने हिंदी की अपने ही घर में क्यों पराई है। ताराचंद्र महतो ने खोरठा भाषा में अपनी रचना प्रस्तुत की। रजनी कटारे ने भगवान राम पर अपनी प्रस्तुति की, राम जहां हो होता वही सुखधाम बहुत सुंदर। उन्होंने एक पूर्णिका भी प्रस्तुत की। लफ्जों का कमाल देखिए। आभासी कवि सम्मेलन में मीना अग्रवाल, निराला, सत्येन्द्र, शीला तिवारी के अलावा कई रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां प्रदान की। अंत में निराला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। जानकारी कहानिका के केंद्रीय सूचना प्रभारी शिखा गोस्वामी निहारिका ने दी।
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