भगवान राम ने वनवास के दौरान वैतरणी नदी तट पर विश्राम किया था-निसार अहमद
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित रामतीर्थ धाम में विशाल धार्मिक मेला आयोजित होगा। रामतीर्थ धाम सज-धज कर श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार है।
ज्ञात हो कि 14 जनवरी की सुबह वैतरणी नदी में पवित्र डुबकी लगाने के बाद भक्त रामेश्वर शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे। संध्या समय वैतरणी तट पर भव्य गंगा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जो मेले का प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
झारखंड सरकार और चाईबासा जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस मेले में लाखों श्रद्धालु सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां (झारखंड) तथा ओडिशा के क्योंझर, मयूरभंज व सुंदरगढ़ जिलों से पहुंचेंगे। उक्त तथ्यों को मुस्लिम होते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपना आदर्श मानने वाले पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में नोवामुंडी क्षेत्र मे चर्चित समाजसेवी तथा राम तीर्थ मंदिर विकास समिति अधिशासी सदस्य निसार अहमद ने 13 जनवरी को बताया।
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान वैतरणी नदी तट पर विश्राम किया था। यहां उनके पदचिह्न और खड़ाऊं मिले थे तथा उन्होंने स्वयं हाथों से शिवलिंग स्थापित किया था। इसी विश्वास से नोवामुंडी स्थित रामेश्वर शिव मंदिर की स्थापना की गयी थी। कहा कि भक्त यहां बेलपत्र, भांग और दूध चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के अलावा हर सोमवार पूरे श्रावण मास, शिवरात्रि व विशेष अवसरों पर यहां पूजा-अर्चना होती रहती है। कहा में यहां चार मंदिरों का पावन धाम रामतीर्थ में एक ही स्थान पर चार प्रमुख मंदिर स्थित हैं।

रामेश्वर शिव मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जहां भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा होती है। सीताराम मंदिर मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम की अर्धांगिनी माता सीता और भगवान राम को समर्पित है। भगवान जगन्नाथ मंदिर मुख्य रूप से ओडिशा की परंपरा से जुड़ा है। वहीं यहां स्थित हनुमान मंदिर भक्तों की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यहां स्नान और अन्य सुविधाएं उपलब्ध है, जिसमें रामतीर्थ में स्नान घाट, घाट से मंदिर तक सीढ़ियां, महिला स्नानघर, विश्राम के लिए चबूतरा व मंडप जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
समाजसेवी निसार अहमद ने बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर यहां लगनेवाले मेले के दौरान प्रशासन पूरी मुस्तैदी से तैनात रहता है। हालांकि, वैतरणी नदी की धारा तेज है, गहराई असमान (कहीं-कहीं 15-20 फीट) और चट्टानों से पानी भंवर बन जाता है। इसलिए सावधानी बरतते हुए केवल चिन्हित स्नान घाट पर ही स्नान करनी चाहिए।
मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर वैतरणी नदी के तट पर स्थित रामतीर्थ मंदिर स्थान देवगाँव के मंदिर कमिटि एवं जिला प्रशासन के सहयोग से मकर संक्रान्ति मेला का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस पावन अवसर पर माँ वैतरणी (आदि गंगा) नदी तट पर संध्या महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसकी देखरेख रामतीर्थ मंदिर कमिटि देवगांव तथा मेला डाक कमिटी नव युवक संघ द्वारा शांति पूर्ण सफल संचालन हेतु जिम्मा सौंपा गया है।
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