सखी री झूमों गाओ रे, सावन आयो रे,
कारी बदरिया छाई है देखो गनन में,
जैसे कजरा सोहे सखी नयन में,
सखी नी एक्सरद रस बरसायो रे,
सावन आयो रे,
सखी री झूमों गाओ रे,
सावन आयो रे!
बाबा धाम में भीड़ है भारी,
भोले बाबा के नाम से गूंजी नगरी सारी,
चलो सखी श्रद्धा वारी चढ़ाओ रे
सावन आयो रे,
सखी री झूमों गाओ रे,
सावन आयो रे!
रमणीयां हरियाली तीज मनाए,
पूर्णमासी को राखी आए, हरितिमा मन को भायो रे,
सावन आयो रे,
सखी री झूमों गाओ रे,
सावन आयो रे!
मोर मनोहारी नाच दिखाए,
सखी सावन में हरी साड़ी भाए,
सुन चूड़हारन, हरी चूड़ी पहनाओ रे ,
सावन आयो रे,
सखी री झूमों गाओ रे,
सावन आयो रे!!
मिनाक्षी जायसवाल “स्वरा” “मधुरिमा
![]()













Leave a Reply