पीयूष पांडेय/बड़बील (ओडिशा)। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से सटे कटक के प्रमुख रेवेंशॉ विश्वविद्यालय ने महिला प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं को शाम 5.30 बजे के बाद परिसर में न रुकने के लिए दिए गए अपने आदेश को वापस ले लिया है।
बताया जाता है कि 157 साल पुराने इस प्रतिष्ठित संस्थान के रजिस्ट्रार द्वारा जारी आदेश, जिसे कुछ घंटों बाद ही वापस ले लिया गया, में कहा गया था कि किसी भी महिला प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्राओं को शाम 5:30 बजे के बाद कार्यस्थल या परिसर में रहने की अनुमति नहीं है। यह निर्णय तब तक लागू रहेगा, जब तक एक औपचारिक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं हो जाती। जिसमें कार्य, समय और सुरक्षा उपायों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश और प्रोटोकॉल निर्धारित किए जाएँगे।
सूत्रों के अनुसार, ओडिशा के एक कॉलेज में कथित यौन उत्पीड़न के बाद एक छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कदम उठाया होगा। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि, विभाग ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया कि इस तरह के आदेश से समाज में गलत संदेश जाएगा। कटक ज़िला स्कूल जिसे अब रेवेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल के नाम से जाना जाता है में इंटरमीडिएट स्तर की कक्षाओं के साथ वर्ष 1868 में स्थापित रेवेनशॉ विश्वविद्यालय 1876 में एक डिग्री कॉलेज बना और अंततः एक राज्य विश्वविद्यालय बना।
कॉलेज का नाम थॉमस एडवर्ड रेवेनशॉ के नाम पर रखा गया था, जो एक ब्रिटिश अधिकारी थे और 1878 तक उड़ीसा के प्रभारी रहे। शुरुआत में यह कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था। इस बीच, ओडिशा सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे सभी संस्थानों/संगठनों द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।
सभी सचिवों और जिला कलेक्टरों को प्रेषित पत्र में ओडिशा के मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने कार्यस्थलों और संस्थानों में, विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी वातावरण सुनिश्चित करने के लिए यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम (पीओएसएच) को सख्ती से लागू करने का अनुरोध किया है।
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