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श्रावणी सोमवार एवं कृष्ण पक्ष एकादशी का सात सौ साल दुर्लभ संयोग

इस एकादशी का एक नाम हरिहरात्मक व्रत-जगद्गुरु लक्ष्मणाचार्य

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर के हरिहरक्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने 21 जुलाई को श्रावणी सोमवार व्रत एवं श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी के महत्व की विस्तार से जानकारी दी।

स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने कहा कि यह दुर्लभ संयोग सात सौ साल बाद आया है, जब श्रावण माह के दूसरी सोमवारी व्रत के दिन ही वैष्णवी पुत्रदा एकादशी यानी कामिका एकादशी व्रत पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज की इस दुर्लभ एकादशी को हरिहरात्मक व्रत भी कहा जाता है।नारायणी नदी किनारे सोनपुर साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश प्रांगण में आयोजित कामिका एकादशी व्रत के अवसर पर भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने उपरोक्त बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि आज जो एकादशी करता है उसके पुत्र-पौत्र सहित सात पीढ़ियों तक को अकाल मौत नहीं आती। उन्होंने कहा कि वृहस्पति जब सिंह राशि में हों, व्यतिपात योग हो तो नासिक गोदावरी में स्नान का जो फल मिलता है, वह फल पुत्रदा एकादशी करनेवालों को मिलता है। एक हजार बाजपेय यज्ञ, एक हजार अश्वमेध यज्ञ का जो फल मिलता है वहीं फल कामिका एकादशी का स्वत: प्राप्त हो जाता है।

उन्होंने कहा कि आज के दिन दीपदान का बहुत बड़ा महत्व है।
दीप तिल के तेल में या गो घृत में जलाना चाहिए। दिन या रात कभी भी जला सकते हैं। जब तक आपका दीपक देवस्थानम में जलता रहेगा तब तक आपके पितर वैकुंठ में अमृत पान करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दीपक में ही देवत्व है। जहां दीप नहीं वहां देवता निवास नहीं करते। लाखों बिजली का बल्ब जला दिया जाए और दीपक नहीं जलाई जाए तो देवता रूष्ट हो जाते हैं।

कहा कि प्रतिष्ठित विग्रह, देवता घर, नदी तट, पीपल वृक्ष, तीर्थ क्षेत्र, सप्त पूरियों, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अवंतिका, जगन्नाथ पूरी इन सप्तपूरियों में जो पितरों के नाम से दीप दान करता है उसके पितर ब्रह्म के आयु पर्यंत वैकुंठ में निवास करते हैं।

आज का एकादशी विलक्षण,यह व्रत हरिहरात्मक व्रत

जगद्गुरु लक्ष्मभाचार्य ने कहा कि आज एकादशी के साथ सोमवार व्रत भी है। यह व्रत हरिहरात्मक व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह संयोग सात सौ वर्षों के बाद आया है। आज की रात्रि में जो जागरण करता है। हरिहर का नाम उच्चारण करता है। उसका पुनर्जन्म नहीं होता।

कहा कि सावन में साग, भादो में दही, आश्विन मास, दूध, कार्तिक में दाल को एकादशी व्रत करनेवालों को नहीं ग्रहण करना चाहिए। श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में इस एकादशी को दोपहर दो बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक महिला भक्तों के भजन-कीर्तन और स्वामी जी के प्रवचन के साथ संपन्न हुआ। दूर दूर से भक्तगण इस कार्यक्रम में आकर भाग लिए।

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