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बैंकों का राष्ट्रीयकरण दिवस पर लोक पंच द्वारा मैं मूर्ख नहीं हूं नुक्कड़ नाटक

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में 19 जुलाई को बैंकों का राष्ट्रीयकरण दिवस के अवसर पर लोक पंच की साइबर क्राइम पर आधारित नुक्कड़ नाटक मैं मूर्ख नहीं हूं का मंचन किया गया।
इस कार्यक्रम में सारे सरकारी बैंकों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के अमरेश विक्रमादित्य ने उपस्थित जनों को साइबर क्राइम के बारे में बताया और लेखक निर्देशक मनीष महीवाल के नाटक मैं मुर्ख नहीं हूँ व् लोक पंच की प्रस्तुति की सराहना की। बैंक ऑफ़ इंडिया के गणेश पांडेय ने सुबह-सुबह गांधी मैदान में आए अतिथियों के बीच पौधा वितरण किया और साथियों को बैंकों का राष्ट्रीयकरण दिवस की शुभकामनाएं दी। वहीं लोक पंच के कलाकारों ने साइबर क्राइम पर आधारित नुक्कड़ नाटक मैं मूर्ख नहीं हूं का सफल मंचन किया, जिसके लेखन और निर्देशन वरिष्ठ कलाकार मनीष महिवाल ने किया।

प्रस्तुत नाटक मैं मुर्ख नहीं हूँ के कथासार के अनुसार उक्त नाटक पति-पत्नी की नोक-झोंक से शुरू होता है। इस दौरान एक फोन आता है और ओटीपी माँगा जाता है। पत्नी उसे ओटीपी देने लगती है तो पति मना करता है। पर पत्नी ओटीपी दे देती है और बाद में बताती है कि मुझे मालूम है कि फोन करनेवाला मेरे साथ फ्रॉड कर रहा था, पर मैंने उसे गलत ओटीपी दे दिया। मुझे मालूम है ओटीपी शेयर करने से नुकसान होता है। हम गांव से आए हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम मुर्ख है।

नाटक के अगले दृश्य में एक व्यक्ति अपने मित्र से बकाया पैसे मांगता है, बातचीत के दौरान पता चलता है कि मित्र का फेसबुक अकाउंट किसी ने हैक कर रखा है और वह उसके मित्रों से पैसा मांग रहा है। ऐसी फेक और फ्रॉड साइबर क्राइम करने वाले से सावधान रहने की बात बताई जाती है। अगले दृश्य में अनजान और फ्रॉड लिंक पर क्लिक करने का क्या परिणाम होता है, यह दिखाया गया है।

नाटक में गायक मोहम्मद रफी के गाए कर्णप्रिय गीत बार-बार के तोहरे कमईयया चोरवा ना ले जाए, जागत रहा भैया तू सोए मत जइह को समावेशीत किया गया है, जिसके माध्यम से जालसाज़ और साइबर अपराधियों से अपने धन को बचाने की बात कही गयी। इसके अलावा जरूरत के अनुसार और कई गीतों का नाटक में इस्तेमाल किया गया है। नाटक के अंत में एक पात्र कहता है कि अब मुझे कोई भी साइबर अपराधी ठग नहीं सकता है क्योंकि मैं मुर्ख नहीं हूं।

प्रस्तुत नाटक में कलाकार रजनीश पांडेय, अभिषेक राज, सहर्ष शुभम, सोनल कुमारी, प्रिया कुमारी, रोहित कुमार एवं मनीष महिवाल प्रमुख भूमिका में है। जबकि, मंच से परे नाल पर मनोज शुक्ला, खंजरी पर अरविंद कुमार, कॉस्टयूम अजीत कुमार, प्रॉपर्टी नीरज शुक्ला, संगीत अभिषेक राज, प्रस्तुति नियंत्रक राम प्रवेश, लेखक-निर्देशक मनीष महिवाल की सराहनीय सहयोग रहा।

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